दमोह जिला अस्पताल में फिर हुई मानवता शर्मसार अस्पताल के वार्ड बॉय ने जिंदा आदमी के साथ कसाइयों की तरह किया बर्ताव।
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दमोह जिला अस्पताल में फिर हुई मानवता शर्मसार अस्पताल के वार्ड बॉय ने जिंदा आदमी के साथ कसाइयों की तरह किया बर्ताव।
दमोह जिला अस्पताल में ऐसी कई घटनाएं देखने को मिलती है जिसमें मानवता शर्मसार होती नजरआती है ऐसा ही एक प्रकरण कुछ दिन पहले आया था जिला अस्पताल में भर्ती महिला मरीज के साथ जिला अस्पताल में पदस्थ ड्यूटी नर्स द्वारा अपना काम खुद ना करके बल्कि वार्ड की महिला सफाई कर्मी से वार्ड में भर्ती महिला को इंजेक्शन और वाटल चढ़वा दी गई थी जिसकी
शिकायत सीएम हेल्पलाइन से लेकर सीएमएचओ मैडम से लेकर कलेक्टर तक से की गई थी उस शिकायत पर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई और ना ही ऐसी स्टाफ नर्स के खिलाफ कोई भी विभागी कार्रवाई की गई जिला अस्पताल में होने वाली अनियमितताओं पर जिला अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी पर्दा डालने में लगे हुए हैं यही वजह है कि जिला अस्पताल के कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद है कि वह आए दिन जिला
अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ आए दिन दुर्व्यवहार करते हैं साथ ही मानवता शर्मशार कर देने वाले कृत्य करते रहते हैं ऐसा ही एक मामला कुछ दिन पहले दमोह जिला अस्पताल में आया किसी वजह से बेहोश हो गए एक युवक को 108 की मदद से दमोह जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया उस व्यक्ति को भर्ती करने के लिए 108 एंबुलेंस लाई जिस मरीज को जिला अस्पताल के स्टेचर पर लिटाकर चली गई जिसके बाद जिला अस्पताल चौकी के सिपाही और वार्ड बॉय द्वारा बेहोश पड़े उस व्यक्ति के साथ मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं घटित की गई

जिसमें स्टेचर पर बेहोश लेटे व्यक्ति को बेरहमी से उठाकर पत्थर की टेबल पर फेंक दिया गया जैसे कि वह कोई मानव नहीं दानव हो और वार्ड बॉय का यह कृत ऐसा लग रहा था कि वह वार्ड बॉय नहीं बल्कि एक कसाई हो जिला अस्पताल में बनी चौकी में पदस्थ सिपाही भी वही समीप खड़े होकर यह कृत्य देखता रहा और उसने बेहोश पड़े मरीज की जरा भी मदद नहीं की ना ही कसाइयों की तरह बिहेव करने वाले कंपाउंडर को ऐसा करने से रोका इस वजह से पुलिस की छवि भी धूमिल हुई है। पुलिस को ट्रेनिंग के दौरान शपथ दिलाई जाती है कि देशभक्ति जन सेवा करते हुए अपनी ड्यूटी का पालन करना है पुलिस वाले के कृत्य से देशभक्ति जन सेवा के पुलिस के इस स्लोगन की छवि धूमिल हुई है वह मरीज ठीक हो जाने के बाद उसने कलेक्टर महोदय को भी इस बात की लिखित शिकायत की है और 181 पर भी उसने सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई है लेकिन जिला

अस्पताल अपने कर्मचारियों को बचाते हुए सीएम हेल्पलाइन का निराकरण के बगैर सीएम हेल्पलाइन बंद कर दी गई जबकि दोषी कंपाउंडर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई तो फिर सीएम हेल्पलाइन का निराकरण कैसे हो गया यह भी एक गंभीर विषय है इस पूरे घटनाक्रम का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद देखना होगा जिला प्रशासन कलेक्टर महोदय इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं या पूर्व की तरह अपने सरकारी कर्मचारियों का बचाव

हर मामले में अस्पताल के बचाव में खड़े होने वाले डॉक्टर शुक्ला इस बार अपने कंपाउंडर का कैसे बचाव कर पाते हैं।
करते हुए जैसे सीएम हेल्पलाइन पर निराकरण कर दिया है ऐसे ही बगैर किसी को जिम्मेदार ठहराए हुए इस मामले में भी लीपापोती कर दी जाएगी। यही कंपाउंडर डॉक्टरों की प्राइवेट क्लीनिक पर भी काम करते हैं जिस वजह से यह डॉक्टर के कई भेद जानते हैं यही वजह है कि डॉक्टर भी इन पर कार्रवाई करने से डरते हे।
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