जब दमोह कलेक्टर का आया फोन पीड़ित शिकायतकर्ता को बंधी थी न्याय की आस 3 माह हो जाने के बाद भी शिकायत पर नहीं हुई कोई कार्यवाही।
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जब दमोह कलेक्टर का आया फोन पीड़ित शिकायतकर्ता को बंधी थी न्याय की आस 3 माह हो जाने के बाद भी शिकायत पर नहीं हुई कोई कार्यवाही।
बड़ी बड़ी खबरों के बीच छूट जाती हैं छोटी महत्वपूर्ण खबरें जिनसे होता है जनता का सीधा सरोकार छोटी महत्वपूर्ण खबरें जानने के लिए देखते रहे डेंजर भारत।

दमोह कलेक्टर द्वारा विगत दिवस देखने को मिला जब जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली से पीड़ित जिला अस्पताल में भर्ती रहे मरीज की शिकायत पर कलेक्टर द्वारा पीड़ित को स्वत: फोन लगाकर उससे उसकी पीडा और आप बीती पूछी गयी और उसकी समस्या समाधान की पहल की गयी थी।दरअसल मामला यह है कि पीड़ित मरीज ने बताया11 मार्च 2024 को चेहरे पर समस्या को लेकर जिला अस्पताल दमोह में भर्ती हुई थी। पीड़ित मरीज का ओपीडी नंबर 20240039195 है। रात लगभग साढ़े सात बजे मुझे जो बॉटल लगाई गई वो ड्यूटी नर्स की बजाए वार्ड में साफ सफाई का काम देखने वाले स्वीपर द्वारा लगाई गई और उसी ने मुझे इंजेक्शन भी लगाया।जिसका मैंने विरोध किया तो ड्यूटी नर्स ने मुझे डांट दिया। यह बात मैंने अपने पति तनुज पाराशर को बताई । जिस पर मेरे पति ने इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन व डॉक्टर जैन के इस नंबर 9644288190 पर की। शिकायत से नाराज होकर मुझे बिना स्वास्थ्य लाभ मिले ही ड्यूटी डॉक्टर बहादुर सिंह द्वारा डिस्चार्ज कर दिया गया। भर्ती के समय मेरी विभिन्न पैथोलॉजी जांच करवाई गई थी लेकिन जांच रिपोर्ट आने के पूर्व ही मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया।

जबकि मैं डॉक्टर बहादुर से कहती रही कि डॉक्टर साहब मुझे आराम नहीं है और मेरी जांच रिपोर्ट भी नहीं आई और महज 12 घंटे हुए हैं मुझे भर्ती हुए यह सभी बातें सुनने के बाद भी डॉक्टर ने मेरी जिला अस्पताल से छुट्टी कर दी जिसके बाद में घर चली गई शाम 5:00 बजे दोबारा से मेरी तबीयत बिगड़ी तो मैं फिर से जिला अस्पताल पहुंची जहां पर मुझे कैजुअल्टी में फिर से भर्ती कर मेरा इलाज किया गया जिससे यह स्पष्ट है कि जिला अस्पताल के डॉक्टर बहादुर सिंह ने द्वेष भावना से मेरी छुट्टी की और मेरे इलाज में लापरवाही की है

जिलाअस्पताल में नर्सों एवं डॉक्टर बहादुर सिंह द्वारा मरीजों से अभद्र व्यवहार किया जाता है। पीड़ित द्वारा यह शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की गई थी इसके बाद आज शिकायतकर्ता को दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर जी ने पीड़ित से पूरी जानकारी ली जिससे पीड़ित का कहना है कि दमोह कलेक्टर साहब का फोन आने से अब हमें न्याय की आस जगी थी और जिला अस्पताल में जो पीड़ित मरीजो को इलाज मिलना चाहिए वह इलाज नहीं मिल पा रहा है और लोग अपनी बीमारी से पीड़ित तो है ही साथ ही अस्पताल के स्टाफ से भी पीड़ित दिखाई पड़ते हैं आप जिला अस्पताल के बाहर खड़े हो जाएं और किसी भी मरीज के परिजनों से अस्पताल के बारे में पूछेंगे तो वह जिला अस्पताल के स्टाफ की बुराइयां करता ही मिलेगा।

इस मामले में आपको बता दें कि तीन माह पहले दमोह कलेक्टर द्वारा पीड़ित को फोन लगाकर शिकायत पर कार्यवाही का भरोसा दिलाया गया था कलेक्टर महोदय के आश्वासन से जहां पीड़ित को न्याय की आस बंधी थी लेकिन आज दिनांक तक पीड़ित को न्याय न मिलने से कलेक्टर महोदय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं ऐसा लगता है की कलेक्टर महोदय की कार्यवाही को प्रशासनिक अधिकारीगण सीरियस नहीं लेते यही वजह है कि आज दिनांक तक पीड़ित को अपनी शिकायत पर कोई न्याय मिलता नहीं दिखाई दे रहा है।
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