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डिजिटल इंडिया का अनोखा उदाहरण या भ्रष्टाचार का नया रूप? दमोह जेल में फोन पे से हो रही वसूली का खुलासा!

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डिजिटल इंडिया का अनोखा उदाहरण या भ्रष्टाचार का नया रूप? दमोह जेल में फोन पे से हो रही वसूली का खुलासा!

दमोह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डिजिटल इंडिया” के सपने को साकार करने का दावा अब भ्रष्टाचार की नई परिभाषा लिख रहा है। दमोह जिला जेल में अब कैदियों के परिजनों से फोनपे के माध्यम से अवैध वसूली की जा रही है। जेल प्रशासन इसे डिजिटल ट्रांजेक्शन व्यवस्था से जोड़ता दिखाई दे रहा हैं , लेकिन हकीकत में यह जेल में फैले भ्रष्टाचार का डिजिटल चेहरा है।

कैदियों से डिजिटल वसूली — “फोनपे” पर आया सच
दमोह जेल में विचाराधीन और सजा काट रहे कैदियों को डराकर वसूली की जा रही है। हाल ही में उड़ीसा के कैदियों के परिजनों से ₹4000 की रकम फोनपे के माध्यम से जेल कर्मी हेमंत अहीरवाल के खाते में भेजी गई।
इससे पहले भी जेल कर्मी बृजेश साहू के खाते में ₹15,000 मंगवाए गए थे, लेकिन उस मामले में जेल अधीक्षक छोटेलाल प्रजापति ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी, यह कहते हुए कि “पैसे गलती से आए और वापस कर दिए गए।”

फर्जी नंबरों से किए जा रहे कॉल — परिजन बन रहे शिकार
भ्रष्टाचार की तह में जाने पर पता चला कि वसूली के लिए फर्जी मोबाइल नंबरों का उपयोग किया जा रहा है।
दो प्रमुख नंबर 6268986961 और 8817813391 सामने आए हैं, जिनसे कैदियों के परिजनों को फोन कर पैसे मंगाए जाते है।


सूत्रों के अनुसार, ऐसे 10 से अधिक फर्जी नंबर जेल के अंदर-बाहर सक्रिय हैं, जिनसे परिजनों को डरा-धमका कर रकम मंगवाई जाती है।
जेल के अंदर सक्रिय पूरा वसूली गिरोह
दमोह जेल में यह भ्रष्टाचार सिर्फ कुछ कर्मियों तक सीमित नहीं है। इसमें सजा काट रहे कैदी, प्रहरी, प्रमुख प्रहरी, और कैंटीन इंचार्ज तक शामिल बताए जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो हर वसूली की रकम में से 20% कमीशन काटकर ऊपरी अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाया जाता है।
शराब, गांजा, बीड़ी-सिगरेट सब ‘पैसों’ से उपलब्ध
जेल के भीतर सुविधा शुल्क के नाम पर कैदियों से वसूली कर उन्हें शराब, बीड़ी, गांजा और सिगरेट जैसी वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं।


पैसों का कमीशन काटकर कैदियों को नकद दिए जाते हैं, जिससे वे यह सारी चीजें जेल में ही खरीदते हैं।
2023 में उत्कृष्ट बालिका छात्रावास की अधीक्षिका ने भी शिकायत की थी कि जेल की चारदीवारी से शराब की खाली बोतलें छात्रावास के रास्ते पर फेंकी जा रही हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
जिला प्रशासन की चुप्पी इस पूरे प्रकरण पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है।
अखबारों में बार-बार भ्रष्टाचार की खबरें छपने के बाद भी कलेक्टर और जेल विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।


अब देखना यह होगा कि कलेक्टर दमोह इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हैं या इसे भी “ झूठा बताकर जेल की बदनामी का हवाला देकर फाइलों में दबा दिया जाएगा।
“डिजिटल इंडिया” के नाम पर चल रहा है “डिजिटल भ्रष्टाचार” — दमोह जेल बना देश के लिए शर्मनाक उदाहरण।
डेंजर भारत करेगा जल्द जेल का एक और बड़ा भ्रष्टाचार उजागर नाम के साथ पिक्चर अभी बाकी है

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