मध्याह्न भोजन की रसोई में करंट से मौत खराब मशीन की शिकायतें अनसुनी, प्रभावशाली एनजीओ संचालक पर उठे सवाल
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मध्याह्न भोजन की रसोई में करंट से मौत
खराब मशीन की शिकायतें अनसुनी, प्रभावशाली एनजीओ संचालक पर उठे सवाल
दो मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
दमोह।
जिले के शासकीय स्कूलों के बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली मध्याह्न भोजन रसोई में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कोतवाली थाना क्षेत्र की मुकेश कॉलोनी, केंद्रीय विद्यालय के पीछे स्थित किचन सेट में सोमवार देर शाम करंट लगने से 30 वर्षीय रामप्रकाश यादव की मौत हो गई। यह हादसा अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का परिणाम बताया जा रहा है।
रामप्रकाश यादव, निवासी घाट बम्होरी, पिछले करीब पांच वर्षों से इसी किचन सेट में कार्यरत थे। यहां से जिले के कई शासकीय स्कूलों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार किया जाता है। सोमवार शाम भोजन की तैयारी के दौरान आलू काटने वाली मशीन में अचानक करंट फैल गया, जिससे रामप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए थे। साथी कर्मचारी विट्टू भदौरिया उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर आरिफ खान ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पहले भी लग चुका था करंट, फिर भी क्यों नहीं सुधरी मशीन?
मृतक के भतीजे राहुल यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संबंधित मशीन में पिछले 15–20 दिनों से करंट आ रहा था। इसकी शिकायत प्रबंधन से कई बार की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि इस रसोई में महिलाएं भी काम करती हैं और इससे पहले दो से तीन कर्मचारियों को करंट लगने की घटनाएं हो चुकी थीं, फिर भी मशीन की मरम्मत या बदलने की जरूरत नहीं समझी गई।
सवाल यह है कि जब बार-बार खतरे की चेतावनी दी जा रही थी, तो किसके संरक्षण में कर्मचारियों की जान जोखिम में डाली जा रही थी?
एनजीओ संचालक की राजनीतिक पहुंच, क्या दब जाएगा मामला?
जिस एनजीओ के माध्यम से यह किचन सेट संचालित किया जा रहा है, उसके संचालक कांग्रेस के पूर्व नेता चंदू राय बताए जा रहे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि संचालक की राजनीतिक पकड़ और प्रभावशाली छवि के चलते इस मामले को दबाने की कोशिश की जा सकती है।

अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन निष्पक्ष जांच करेगा?
या फिर यह मौत भी प्रभाव और पहुंच की भेंट चढ़ जाएगी?
दो मासूम बच्चों और पत्नी के सामने जीवन का संकट
रामप्रकाश यादव अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके पीछे पांच साल की बेटी, चार साल का बेटा और पत्नी रह गए हैं। एक झटके में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
हजारों बच्चों के भोजन की रसोई, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा शून्य?
जिस रसोई से रोज हजारों बच्चों का भोजन तैयार होता है, वहां
बिजली सुरक्षा की कोई व्यवस्था क्यों नहीं?
मशीनों की नियमित जांच क्यों नहीं होती?
कर्मचारियों की जान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
फिलहाल शव जिला अस्पताल के शवगृह में रखा गया है। मंगलवार को पंचनामा और पोस्टमार्टम के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया की जाएगी।
यह हादसा एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि पूरे मध्याह्न भोजन तंत्र पर एक बड़ा सवाल है।
अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करता है या यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।
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