महादेव घाट मेला में सख्ती, बुंदेली महोत्सव में चुप्पी क्यों? खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल** दमोह |
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महादेव घाट मेला में सख्ती, बुंदेली महोत्सव में चुप्पी क्यों?
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल**
दमोह |
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देशों के तहत खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग ने महादेव घाट मेला क्षेत्र में अस्थायी होटल, चाऊमीन सेंटर, फास्ट फूड, मिठाई, चाट-फुल्की एवं नाश्ता दुकानों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी से खाद्य सामग्री की जांच की गई, जिसमें अखाद्य फूड कलर का खुलकर इस्तेमाल सामने आया।

जांच में 82 किलो अखाद्य कलर युक्त बेसन लड्डू, चाऊमीन, चाट मटर, मंचूरियन, जलेबी एवं कॉटन कैंडी जब्त कर मौके पर ही विनष्ट की गई। जब्त सामग्री का बाजार मूल्य लगभग 10,560 रुपए बताया गया। खाद्य व्यापारियों को खुले में खाद्य सामग्री निर्माण, संग्रह एवं विक्रय न करने तथा अखाद्य रंगों के उपयोग से बचने के निर्देश भी दिए गए।

जहां एक ओर महादेव घाट मेले में छोटे दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर दमोह के तहसील ग्राउंड में चल रहे बुंदेली महोत्सव मेले को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
50 हजार लोगों की भीड़, 100 से अधिक दुकानें—फिर भी जांच से दूरी
बुंदेली महोत्सव मेले में प्रतिदिन लगभग 50,000 लोग पहुंच रहे हैं, जहां खाने-पीने की करीब 100 से अधिक दुकानें लगी हुई हैं। अधिकांश दुकानदार बाहर से आए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा न तो नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और न ही खाद्य सामग्री के सैंपल लिए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह मेला प्रभावशाली लोगों और न्यास द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिस कारण खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश अहिरवार वहां जाने से कतरा रहे हैं। सवाल यह है कि जहां भीड़ और खतरा ज्यादा है, वहां जांच से परहेज क्यों?
खानापूर्ति या खाद्य सुरक्षा?

आरोप है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी छोटे मेलों और गरीब दुकानदारों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर रहे हैं और अपनी पीठ थपथपाने में लगे हैं, जबकि बड़े और प्रभावशाली आयोजनों में नियमों की अनदेखी हो रही है।
यदि बुंदेली महोत्सव मेले में किसी प्रकार की फूड पॉइजनिंग या स्वास्थ्य आपदा होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं?

प्रशासन से उठी निष्पक्ष जांच की मांग
अब जरूरत है कि प्रशासन भेदभाव रहित कार्रवाई करे और बुंदेली महोत्सव जैसे बड़े आयोजनों में भी खाद्य सुरक्षा के सख्त मानकों का पालन कराया जाए। जनता की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
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