मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सभी सिद्ध क्षेत्रों में लगाए गए मेलों में इस बार आत्मनिर्भर भारत दिखाई दिया| डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर
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मकर संक्रांति के पावन पर्व को लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं |हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बड़ा महत्व है। इस साल यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाता है इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिसका अर्थ है कि सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है। जिसके कारण पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती हैं।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति से ही मौसम में बदलाव की शुरुआत हो जाती है। शरद ऋतु का अंत होता है तो बसंत ऋतु की शुरुआत होती है।

सूर्य मकर राशि में आने से मकर संक्रांति का यह पर्व मनाया जाता है इस पावन पर्व पर तीर्थ क्षेत्र में आने वाली नदियों में नहाने का भी बड़ा महत्व है इस दिन नहाने के लिए हमारे बुंदेलखंड में बुड़की महोत्सव भी कहते हैं दमोह के सिद्ध क्षेत्र बांदकपुर और शहरी क्षेत्र मैं स्थित जटाशंकर धाम में आज बड़ी संख्या में लोगों ने सिद्ध क्षेत्रों पर पहुंचकर बुड़की स्नान कर शिवजी को जल अर्पित कर सिद्ध क्षेत्र में लगे मेले में पहुंचकर जमकर खरीदारी की इसमें प्रमुख आकर्षण का केंद्र इस बार आत्मनिर्भर भारत देखने को मिला चाइनीज खिलौनों से लोगों ने दूरियां बना ली है देसी प्रोडक्ट जैसे मेलों से गायब हो चुके थे आज

वह सभी देखने को मिले मैं जब बचपन में मेला जाता था तो मां मुझे 10 पैसे की चकरी ले देती थी आज 30 साल बाद मैंने अपनी बच्ची के लिए चकरी ली तो मुझे अपने बचपन के दिन याद आ गए 10 पैसे की चकरी आज ₹10 की भले ही हो गई हो लेकिन उसका मजा आज भी वैसा ही है जैसा आज से 30 साल पहले था प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद करते हैं कि हमारे खेल खिलौने पर चाइनीस खिलौने ने जगह ले ली थी वह वापस दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका रही आत्मनिर्भर भारत के रूप में आज देसी खिलौने वापस बाजार में और मेलों में देखने को मिले
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