एमपी गजब है सबसे अजब है यूं ही नहीं कहा जाता। ई टेंडरिंग के जरिए सड़क निर्माण के ठेके का नहीं किया गया दमोह नगर पालिका द्वारा पालन।
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एमपी गजब है सबसे अजब है यूं ही नहीं कहा जाता। ई टेंडरिंग के जरिए सड़क निर्माण के ठेके का नहीं किया गया दमोह नगर पालिका द्वारा पालन।
एमपी गजब है सबसे अजब है यूं ही नहीं कहा जाता आपको बता दें कि दमोह नगर पालिका ने ई टेंडरिंग की प्रोसीजर की उड़ाई धज्जियां।
प्रशासन कितनी ही अच्छी योजनाएं बना ले जिससे भ्रष्टाचार ना हो लेकिन भ्रष्टाचारी अपने तरीके निकाल ही लेते हैं आपको बता दें कि केंद्र और प्रदेश सरकार के द्वारा ई टेंडरिंग प्रोसीजर चालू किया गया था जिससे सभी टेंडर पारदर्शी तरीके से हो और सरकार को ई टेंडरिंग के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोग ई टेंडरिंग में भाग लेकर अच्छे से अच्छा निर्माण हो सके और भ्रष्टाचार भी रुक सके यही वजह है कि प्रदेश सरकार द्वारा सभी टेंडर ई टेंडरिंग के जरिए किए जा रहे हैं आपको बता दें कि नगरपालिका ने भी 4 माह पहले पेपर में निविदा देकर जिले में 3 सड़कों का निर्माण कराया जाना था जिसमें एक सड़क पुराने पुलिस कंट्रोल रूम से फिल्टर प्लांट तक दूसरी सड़क सरस्वती रेस्ट हाउस से पीडब्ल्यूडी क्वार्टरों से होते हुए मेन सड़क तक और तीसरी सड़क बजरिया 6 में नर्सिंग सेंटर तक।


यह तीनों सड़कों में ईटेंडरिंग की सूचना के लिए पेपरों में जो निविदा निकली थी जिसकी 2 जून को टेंडर की आखिरी डेट थी और 4 जून को टेंडर खोले जाने थे लेकिन आपको बता दें कि ईटेंडरिंग के जरिए अभी टेंडर की आखिरी डेट नहीं निकली है ना ही टेंडर खोले गए हैं लेकिन रेस्ट हाउस से पीडब्ल्यूडी क्वार्टर होते हुए मेन रोड तक पूरी सीसी रोड बन चुकी है जोकि टेंडर में डामर रोड बनी थी लेकिन जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का यही सोच रखते हुए

ईटेंडरिंग की धज्जियां उड़ाते हुए डामर रोड को सीसी रोड में तब्दील कर बना दी गई दूसरी रोड फिल्टर प्लांट से पुराने कंट्रोल रूम तक की जो सड़क है उसका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है करीब 100 मीटर तक रोड बन चुकी है। नगर पालिका कलेक्टर के अधीन चल रही है अब देखना होगा दमोह कलेक्टर कब तक इस बड़े भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेते हैं और ठेकेदार और भ्रष्टाचारियों पर कब तक गाज गिरती है
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