दमोह का नाप तोल विभाग सो रहा कुंभकर्णी निंद्रा में लोगों को लग रहा चूना और प्रशासन को हो रहा नुकसान।
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दमोह का नाप तोल विभाग सो रहा कुंभकर्णी निंद्रा में लोगों को लग रहा चूना और प्रशासन को हो रहा नुकसान।
दमोह जिले में बनी नापतोल विभाग के बारे में शायद कभी किसी ने किसी पेपर में कोई समाचार सुना हो कि नापतोल विभाग ने कहीं पर भी कोई कार्यवाही की हो यही वजह है कि आज दमोह में धड़ल्ले से नापतोल विभाग को चिढ़ाते हुए कई व्यवसाई धड़ल्ले से उपभोक्ताओं को कम तोलकर सामान बेच रहे हैं और नापतोल विभाग कुंभकर्णी निंद्रा में सो रहा है मध्य प्रदेश लघु व्यापारी संघ द्वारा कई बार ज्ञापन देने के बावजूद भी आज तक नापतोल विभाग द्वारा कोई भी दुकानदार या किसी भी फैक्ट्री मालिक पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई आपको बता दें कि उदाहरण के तौर पर जैसे पारले जी बिस्कुट की पेटी आती है तो उस पेटी पर लिखा होता है कि इसमें पारले जी के बिस्कुट हैं और कितने पैकेट एक पेटी में है जोकि नापतोल विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार अनिवार्य है जबकि पान मसाला गुटखा बनाने वाली कंपनियां अपने गुटखो को बोरियों में भरकर बाजारों में बेच रही हैं और ना उस पर ब्रांड का मार्क होता है ना क्वांटिटी लिखी होती है जिसे नापतोल विभाग द्वारा पकड़ना चाहिए जिसकी कई बार लघु व्यापारी संघ ने शिकायत की लेकिन आज तक नापतोल विभाग वहां नहीं पहुंचा तो आप खुद अंदाज लगा सकते हैं

कि जब शिकायत करने पर नापतोल विभाग कोई कार्यवाही नहीं करता तो भला बाजार में जो आटा चक्की संचालक हैं और कई फैक्ट्रियां जो सिंधी कैंप में मैन्युफैक्चरिंग कर रही है उन्हें चेक करने वाला यहां क्यों जाएंगे कई आटा चक्की तो आज भी अंग्रेजों के जमाने की लगी हुई है और वह आज भी पत्थरों से गेहूं तौल कर आटा पीसते हैं। लोग तो यहां तक कहने लगे हैं कि शायद मिनी आटा चक्की से नापतोल विभाग को आटा जाता होगा इसीलिए आज तक कार्यवाही नहीं की गई।

सरकार की मंशा तो हर व्यक्ति को न्याय दिलाने की होती है यही वजह है कि हर क्षेत्र की कालाबाजारी रोकने के लिए डिपार्टमेंट बनाए गए हैं लेकिन सरकारी नौकरी मिलते ही यह डिपार्टमेंट ऊपरी कमाई के जरिया बन जाते हैं और जनता बेचारी लुटती रहती है अब देखना होगा कि दमोह नापतोल विभाग कब कुंभकर्णी निद्रा से उठता है और दमोह में हो रही अनियमितताओं पर ध्यान देता है!

दमोह में कई आटा चक्की असाटी वार्ड और नूरी नगर और कई पिछड़े क्षेत्रों में संचालित हैं यहां पर आज भी पत्थर से वजन किया जाता है और लोगों का यह भी कहना है कि जब भी नापतोल विभाग शिकायत करने जाते हैं तो वहां ताला डला रहता है अधिकारी लोग कार्यालय में नहीं बैठते और फील्ड का झांसा देते हैं और ना ही फील्ड पर जाते हैं
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