दमोह जिले में कल रात मोहर्रम के दसवे दिन हुए ताजिया ठंडे।जमकर हथियारों की गई नुमाइश। गनीमत रही कोई भी दुर्घटना सामने नहीं आई।
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दमोह जिले में कल रात मोहर्रम के दसवे दिन हुए ताजिया ठंडे।जमकर हथियारों की गई नुमाइश। गनीमत रही कोई भी दुर्घटना सामने नहीं आई।
महीनों में मोहर्रम का महीना जब भी आता है शहीदे कर्बला की याद सबको रुलाती है।


कर्बला की जंग हजरत इमाम हुसैन और बादशाह यजीद की सेना के बीच हुई थी. मान्यताओं के मुताबिक, मुहर्रम के महीने में 10वें दिन ही इस्लाम की रक्षा के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपनी जान कुर्बान कर दी थी. इसलिए मुहर्रम महीने के 10वें दिन मुहर्रम मनाया जाता है. बता दें कि 1400 साल पहले कर्बला में जंग हुई।
यही वजह है कि मुस्लिम समाज द्वारा मोहर्रम के महीने में कोई भी शादी विवाह नहीं करता और इस महीने को मातम का महीना मानते हुए उलेमाओं द्वारा समाज में तकरीरें दी जाती हैं और हजरत इमाम हुसैन के बारे में और उनकी शहादत के बारे में सभी को बताया जाता है।


दमोह में कल रात मोहर्रम के दिवस पर दमोह की सभी मुस्लिम समाज द्वारा रखे जाने वाले ताजियों को पहले शहरगस्त कराया और फिर सभी ताजिए स्थानीय सैंडेवेद चौराहे पर एकत्रित होकर गड़ी मोहल्ला से पठानी मोहल्ला होते हुए कर्बला के तालाब में ताजीया ठंडे किए गए। ताजियों के शहरगश्त के दौरान मुस्लिम समाज द्वारा अखाड़ों का भी प्रदर्शन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोग हथियार का प्रदर्शन करते दिखाई दिए जिसमें मासूम छोटे बच्चे भी हथियार लिए दिखाई दिए और जुलूस में चले वाहन के बोनट पर बच्चों को बैठाया गया गनी मत रही कि कोई भी अनहोनी की जानकारी नही मिली। इस मौके पर जिले के वरिष्ठ वकील गजेंद्र चौबे जी शहर गस्त में शामिल हुए
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