रोशनी के महापर्व दीपावली के दिन भी सरदार सेतु रहा अंधेरे में।
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रोशनी के महापर्व दीपावली के दिन भी सरदार सेतु रहा अंधेरे में।
दमोह जिले में दीपावली के महापर्व पर लोगों ने अपने घरों को किया जगमगाया तो वही शहर भी जगमग दिखाई दिया तो वही आज से कुछ साल पहले बड़ी ही भव्यता और सुंदरता के साथ सरदार सेतु ओवर ब्रिज दमोह के पूर्व वित्त मंत्री जयंत कुमार मलैया के द्वारा बनवाए गए इस ब्रिज को जयंत मलैया के पद से हटते ही इस सेतु को उपेक्षा का शिकार बनना पड़ रहा है क्या वजह है कि सरदार सेतु की सुंदरता मैं चार चांद लगाने वाली ओवरब्रिज की लाइटें पिछले कई सालों से बंद पड़ी है और जिला प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है
पहले
और अब
आपको बता दें कि इस ब्रिज के समीप ही सरदार वल्लभ भाई पटेल की भव्य प्रतिमा का अनावरण मात्र 5 दिन बाद होना है इसके बावजूद भी अभी तक इस ब्रिज की लाइटें चालू नहीं की गई। रोशनी के पर्व दीपावली पर जब इस ब्रिज को जगमग दिखाई देना था तब भी आज यह अंधेरे में डूबा दिखाई दिया। यह ब्रिज आज अपनी दुर्दशा बयान नहीं कर पा रहा लेकिन इसे देखकर दमोह में राजनीतिक उठापटक के कारण दमोह की राजनीति की दुर्दशा जरूर बयान कर रहा है।


सुनने में आया है कि जिला पंचायत के अधीन आने वाला यह ब्रिज आज इसलिए अंधेरे में डूबा हुआ है कि जिला पंचायत के पास इसमें खर्च होने वाली विद्युत का बिल भरने के पैसे नहीं है। इस ब्रिज की स्टे लाइट का खर्च अगर पंचायत नहीं उठा सकती तो जिला प्रशासन से अनुरोध है कि दमोह जिला अस्पताल में जो सोलर पैनल सड़ रहा है उसे ही इसकी विद्युत सप्लाई के लिए लगा दिया जाए ताकि सरकार के लाखों रुपए जो सोलर पैनल में जिला अस्पताल में लगे हैं वह काम में आ सके और सरदार सरोवर को जगमगा दे क्योंकि यह सरदार सरोवर ब्रिज शहर की शुरुआत में ही पड़ता है जहां पर लोग निकलते हैं और शहर की बदहाली शुरुआत में ही दिखाई देती है। सरकार चाहे तो सब कर सकती है लेकिन सरदार सरोवर को बदहाल व्यवस्था देने वाले नहीं चाहते कि सरदार सरोवर ब्रिज दमोह की आन बान शान बन सके।
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