नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 81090 62404 , +91 81090 62404 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , कुपोषित बच्चों पर सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है उसके बावजूद भी नहीं रुक रही कुपोषित बच्चों की मौत। – DB News – Danger Bharat News

लाइव कैलेंडर

February 2026
M T W T F S S
« Jan    
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  

LIVE FM सुनें

DB News – Danger Bharat News

www.dangerbharatnews.com

कुपोषित बच्चों पर सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है उसके बावजूद भी नहीं रुक रही कुपोषित बच्चों की मौत।

1 min read
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

दमोह, कुपोषित बच्चों को बचाने के लिए सरकार भले ही पानी की तरह पैसा बहा रही हो लेकिन दमोह जिले में आज भी कुपोषित बच्चों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और प्रशासन की योजना के मुताबिक जरूरतमंद तक इस योजना का लाभ मिलता नहीं दिखाई दे रहा है यही वजह है कि बीते दिनों दमोह के तेंदूखेड़ा विकासखंड के ग्राम घुटरिया निवासी नारायण गौड़ की 1 साल 6 माह की बच्ची जो बेहद कमजोर और कुपोषित के अभाव में जिला अस्पताल लाई गई जहां उसे भर्ती कर इलाज किया गया लेकिन बच्ची को नहीं बचाया जा सका।


कुपोषित बच्चों के लिए सरकार की यह योजना है
मिड डे मील योजना वर्तमान में भारत सरकार द्वारा संचालित एक बहुत ही जानी पहचानी योजना है. इसकी शुरुआत 15 अगस्त 1995 को की गई थी. शुरुआत में इस योजना को देश के 3408 विकसित खंड में लागू किया गया था और बाद में सन 1997-98 में यह कार्यक्रम देश के हर ब्लॉक में लागू कर दिया गया. मिड डे मील का सबसे बड़ा उद्देश्य लाखों गरीब परिवारों के उन बच्चों को भुखमरी से बचाना है जो घर में राशन की कमी के कारण बिना कुछ खाए पिए स्कूल आने को मजबूर हैं. जिससे धीरे-धीरे बहुत से बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं. इसी कुपोषण से उन्हें बचाने के लिए सरकार द्वारा मिड-डे-मील की योजना चलाई गई, जिसमें एक अच्छी खासी मात्रा में उन्हें रोज अलग अलग डाइट दिए जाने का प्रावधान है. यह योजना गरीब बच्चों के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित हुई है. इससे स्कूल में बच्चों की भागीदारी बढ़ी है. केवल उनकी नामांकन की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि बच्चों की उपस्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आया है. स्कूली बच्चों को सेहतमंद बनाना भी मिड डे मील योजना का एक हिस्सा है. यह योजना बच्चों को नियंत्रित पोषण आहार प्रदान करने की भूमिका अदा करती है. जिससे बच्चों में तंदुरुस्ती बढ़ेगी और उनका संपूर्ण शारीरिक विकास संभव हो सकेगा।


सरकार की यह महत्वपूर्ण आकांक्षा भरी योजना दमोह में आते ही दम तोड़ती नजर आ रही है क्योंकि यहां पर इस योजना के अंतर्गत पैसे तो पानी की तरह बहाए जा रहे हैं लेकिन जमीन पर इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है। भले ही इस बच्ची की मौत पर दमोह कलेक्टर ने दुख जताते हुए जांच की बात की कहीं हो।

और डॉक्टर ने बच्ची को सीरियस अवस्था में लाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ दिया हो लेकिन सवाल तो यह है कि इस योजना के क्रियान्वयन में बहुत ही गड़बड़ियां हैं यही वजह है कि जरूरतमंद तक यह योजना का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

यह योजना गर्भवती महिला के गर्भ धारण से प्रारंभ हो जाती है जिसे शुरुआती दिनों से ही आंगनवाड़ी से मिड डे मील मिलना प्रारंभ हो जाता है और आंगनबाड़ी बहनाएं गर्भवती महिलाओं का वजन कर यह सुनिश्चित करती है कि बच्चा कुपोषित ना हो और उन्हें भरपूर आहार आंगनबाड़ी के माध्यम से दिया जाता रहे। इसके बावजूद भी अगर दमोह जिले में कुपोषण से मौतें हो रही हैं तो यह बहुत ही चिंता का विषय बना हुआ है।

सरकार की महत्वपूर्ण योजना में पलीता लगाने वाले लोगों पर इस घटना के बाद देखना होगा। जिम्मेदार अधिकारी क्या कार्यवाही करते हैं?

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now