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कई सालों से बंद पड़ी मोहन टॉकीज में से चलने लगे पत्थर आधा दर्जन दुकानों पर गिरे पत्थर।

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कई सालों से बंद पड़ी मोहन टॉकीज में से चलने लगे पत्थर आधा दर्जन दुकानों पर गिरे पत्थर।

दमोह पिछले दो-तीन दिन पहले दमोह के टॉकीज चौराहे पर मोहन टॉकीज को मिटवाकर बनवाए जा रहे मल्टीप्लेक्स में से अचानक पत्थरों की बारिश होने लगी मोहन टाकीज के सामने की आधा दर्जन दुकानों पर पत्थरों की बारिश होने से वहां हड़कंप के हालत निर्मित हो गए जब पत्थर की बारिश रुकी तो वहां के दुकानदारों ने मोहन टॉकीज में बन रहे मल्टीप्लेक्स में जाकर देखा कि कौन पत्थर फेंक रहा है तो वहां कोई नहीं मिला महज एक बुढें चौकीदार के अलावा कोई नहीं मिला चौकीदार का कहना था कि हमने पत्थर नहीं फेंके में क्यों पत्थर फेंकूगां और ना ही मैंने किसी को यहां से पत्थर फेंकते हुए देखा है।

इसी बात को लेकर मोहन टॉकीज की पुरानी कहानियां भी सामने आने लगी 85 साल के एक बुजुर्ग तारा सोनी ने बताया कि मैं जब 10 15 साल का था तब टॉकीज का काम हमारे सामने ही चालू हुआ था मोहन टॉकीज की गेट पर एक बहुत बड़ी सी बहर थी जिसमें हमारे बुजुर्ग हमसे कहा करते थे कि उस ओर मत जाना वहां डा़यन व चुड़ैलों का वास है वहां उस वक्त दिन में भी लोग जाने से डरते थे फिर जब मोहन टॉकीज बनी तो टॉकीज मालिकों को भी बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा यही वजह थी कि मोहन टॉकीज के गेट पर तंत्र साधना कर कर चुड़ैलों की मूर्ति बनवाई गई थी।

70 साल आयु के एक और बुजुर्ग कल्लन रैकवार का भी कहना है की मोहन टॉकीज में चुड़ैलों की बातें हमारे बचपन में हमारे बुजुर्ग बताते आए हैं और जब मैं जवान हुआ और टॉकीज चलने लगी उस वक्त भी कई घटनाएं सामने आती रहती थी मोहन टॉकीज की जो मशीन चलाते थे सोनी जी वह मेरे मित्र थे उन्होंने मुझे कई बार बताया कि मैं रात में टॉकीज बंद करके घर चला जाता हूं उसके बाद रात में अचानक एक से 1:30 बजे टॉकीज की सारी मशीन चालू हो जाती हैं और फिल्म भी चलने लगती है जिससे मुझे दोबारा टॉकीज की मशीन बंद करने आना पड़ता है।

ताजा घटना के बारे में वहां के दुकानदार कपिल चौरसिया ने बताया कि रात करीब 8:00 से 9:00 बजे मोहन टॉकीज जहां पर अभी मल्टीप्लेक्स बन रहा है उस ओर से कई पत्थर मेरी दुकान की चद्दर पर व हमारी दुकान के सामने गिरे। दूसरे दुकानदार रामकुमार चौरसिया ने भी बताया कि हमारी दुकान के ऊपर पत्थर गिरे और हमारी दुकान के सामने भी पत्थर आए। तीसरी दुकानदार शेखर सेन व उनके दुकान मालिक दोनों ने बताया कि हमारी दुकान पर भी पत्थर गिरे हमारी दुकान का कांच टूटते टूटते बचा और हमारी दुकान की चद्दर पर भी पत्थर आए यह घटनाक्रम पहले थोड़े-थोड़े पत्थरों से शुरू हुआ और बाद में तेज पत्थरो से खत्म हुआ बाजू में विनोद चौरसिया की दुकान पर खड़े ग्राहकों ने भी बताया कि उस वक्त हम लोग यहां पर पान खा रहे थे और अचानक से मोहन टॉकीज की ओर से पत्थर आने लगे पत्थरों की बारिश रुकते ही हम लोग टॉकीज के अंदर गए तो वहां चौकीदार के अलावा कोई नहीं दिखाई दिया। आपको बताते हैं कि इस घटना में किसी को चोट नहीं लगी यही वजह है कि किसी ने इस घटना की शिकायत भी नहीं की है।

अगर इस घटना की जांच होती है तो उससे स्पष्ट हो पाएगा कि किसी शरारती तत्वों का काम है या कोई ऊपरी चक्कर फिलहाल अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता जब तक की घटना की सही वजह सामने नहीं आती। लेकिन इस घटना के बाद से इस क्षेत्र में दहशत के हालात बने हुए हैं

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