आईआरसीटीसी के कर्मचारी की मिली भगत से अनाधीकृत लोगो द्वारा बेचा जा रहा खाना जिससे लोगों को फूड प्वाइजन का बना हुआ खतरा।
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आईआरसीटीसी के कर्मचारी की मिली भगत से अनाधीकृत लोगो द्वारा बेचा जा रहा खाना जिससे लोगों को फूड प्वाइजन का बना हुआ खतरा।
आपको बता दें कि भारत सरकार द्वारा संपूर्ण ट्रेनों में अधिकृत रूप से खाने की सप्लाई का टेंडर व सभी ट्रेनों में पैंट्री की व्यवस्था सरकार द्वारा संपूर्ण भारत की ट्रेनों में अधिकृत रूप से आईआरसीटीसी को अधिकृत रूप से हर ट्रेन में खाने की सुविधा के लिए ठेका दिया गया है लेकिन इस कंपनी के कर्मचारियों की मिली भगत से इन दिनों कई माफिया इसमें सक्रिय रूप से कार्य कर चलती ट्रेनों में लोगों को आईआरसीटीसी के नाम से खाने का

आर्डर लेते हैं और ट्रेन की रूट के अनुसार कई स्टेशनों पर खाना मुहैया कराने के ऑर्डर लेते हैं जिसमें ट्रेन में बैठे यात्री ने अधिकृत रूप से पैंट्री के कर्मचारी मानकर खाने का ऑर्डर दे देते हैं लेकिन इन माफियाओं के द्वारा बाद में लोगों से मनमाने रेट वसूले जाते हैं और क्वालिटी के नाम पर खाने में कुछ नहीं होता उल्टा लोगों को घटिया खाना सप्लाई किया जाता है जिससे लोग खाकर बीमार हो सकते हैं इस संबंध में हजरत निजामुद्दीन से दमोह सफर करने वाले हमारे संवाददाता ने ऐसा ही कुछ अनुभव किया उन्हें हजरत

निजामुद्दीन से चलने वाली ट्रेन कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस गाड़ी नंबर18478 मथुरा स्टेशन पर इन माफिया द्वारा रेल के अंदर खाने का मेनू कार्ड देकर अधिकृत होने के सबूत देते हुए खाने के आर्डर लिए गए जब मेनू कार्ड पर लिखे नंबर पर फोन लगाकर झांसी में खाना ऑर्डर किया गया तो ₹100 का खाना ₹200 में दिया गया और साथ ही खाने की क्वालिटी भी गड़बड़ दिखाई दीं जब इस पर शिकायत की गई तो रेलवे के कैंटीन के कई कर्मचारी S3 में मौजूद हमारे संवाददाता की शिकायत पर वहां पहुंचे जिन्होंने बताया कि यह अनऑथराइज्ड पर्सन है जो रेल में ऑथराइज्ड नहीं है लेकिन उसके बावजूद भी रेल के डिब्बो में खाना बेचते हैं जिन्हें हम लोग मना करते हैं तो वह लड़ाई झगड़ा करते हैं और गुंडागर्दी करते हैं उनकी गुंडागर्दी से खौफ में रहकर हम लोग आज तक इन पर कोई भी कार्यवाही नहीं करवा पाते हैं ना ही इन्हें रोक पाते हैं अब रेल

विभाग के कैंटीन के कर्मचारियों का यह कहना एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि अनऑथराइज्ड पर्सन रेल के डिब्बे में कैसे खाना बेच सकते हैं और जिनका खौफ रेलवे के पैंट्री के कर्मचारियों में भी देखा जा रहा है अगर जल्दी ही ऐसे लोगों पर कार्रवाही नहीं की गई तो कभी भी कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है और फूड प्वाइजनिंग के कारण कई लोगों की मौत हो सकती है जिसकी जिम्मेदार यह माफिया होंगे लेकिन शिकायतकर्ता अधिकांश रेलवे के कैंटीन की करते हैं क्योंकि रेलवे में सफर करने वाले लोगों को यह मालूम नहीं होता कि रेलवे में अनऑथराइज्ड पर्सन भी ऑर्डर लेकर घटिया खाना सप्लाई कर रहे हैं रेलवे में सफर करने वाले कई लोगों ने यह सवाल उठाए की ऑथराइज्ड पर्सन की मिली
भगत से ही यह कार्य संभव है अनऑथराइज्ड पर्सन जो रेलवे में घटिया खाना बेच रहे हैं यह लोग इन पैंट्री चलाने वालों को बड़ा मुनाफा करते हैं यही वजह है कि यह लोग इन्हें रोकते नहीं है और अपने बचाव में ऐसे बयान देते हैं कि यह लोग गुंडागर्दी कर कर ट्रेनों में घुसते हैं और उनसे मारपीट की संभावना के कारण हम लोग उन्हें मना नहीं करते लेकिन लोगों का कहना है की पैंट्री के कई कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण ही यह ट्रेनों में घटिया फ्रूट सप्लाई करते हैं जिससे लोगों को फूड प्वाइजन का खतरा बना हुआ है।
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