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क्या दमोह जेल बन गया है दुर्दांत अपराधियों की ऐशगाह? वायरल वीडियो ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल

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क्या दमोह जेल बन गया है दुर्दांत अपराधियों की ऐशगाह?
वायरल वीडियो ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल

दमोह। एक बार फिर दमोह जिला जेल सुर्खियों में है—इस बार जेल के भीतर से सामने आया एक वीडियो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल हो रहा यह वीडियो कासिम नामक कुख्यात अपराधी का बताया जा रहा है, जो हत्या, लूट, गौहत्या और पुलिस पर फायरिंग जैसे दो दर्जन से अधिक मामलों में आरोपी है और इस समय दमोह जेल में बंद है।

पुलिस पर गोली चलाने वाला अपराधी अब आराम से जेल में?

कासिम वही अपराधी है, जिसने कुछ माह पहले गौहत्या मामले में पकड़े जाने के दौरान हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं पर गोलीबारी की थी और फरार हो गया था। गिरफ्तारी के बाद, जब पुलिस उसे अवैध हथियार बरामद करने के लिए किसन तलैया ले गई, वहां उसने झाड़ियों में छिपाकर रखे हथियार से ASI आनंद अहीरवाल पर गोली चला दी थी। गंभीर रूप से घायल ASI को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद पुलिस ने कासिम को शॉर्ट एनकाउंटर में गिरफ्तार किया।

लेकिन अब जेल में रहकर वह ‘सजा’ नहीं बल्कि ‘मजा’ काटता दिख रहा है। वायरल वीडियो में कासिम आरामदायक स्थिति में नजर आ रहा है। उसके पास मोबाइल फोन होना और कथित रूप से विशेष भोजन-सुविधाएं मिलना इस ओर इशारा करते हैं कि जेल के भीतर उसे किसी अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है।

जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कासिम जेल में न केवल खुलकर घूम रहा है, बल्कि प्रहरीयों से हँस-हँस कर बातचीत भी कर रहा है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि वीडियो बनाने की उसे पूर्व जानकारी थी, और जेल कर्मचारियों के साथ उसके संबंध ‘सामान्य’ से कहीं अधिक ‘सहज’ हैं।

जेल नहीं, विश्रामगृह बनती जा रही हैं जेमें

सूत्रों की मानें तो दमोह जेल के अंदर पैसों का बोलबाला है। जेल में शराब, गांजा और अन्य मादक पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। नए कैदियों से पैसा वसूला जाता है—नहीं देने पर उनके साथ क्रूरता की जाती है। हाल ही में दो कैदियों की बेरहमी से पिटाई की गई, जिसमें एक की आंख के पास चोट आई तो दूसरे के शरीर पर गंभीर जख्म हुए।

पैसा देने वाले कैदियों को विशेष खाना, सोने की अलग जगह और अस्पताल में रेफर होने जैसी ‘सुविधाएं’ आसानी से मिल जाती हैं। जेल के डॉक्टर तक से सेटिंग करके अस्पताल भेजने की व्यवस्था की जाती है।

प्रशासनिक निरीक्षण महज़ दिखावा

जेल अधीक्षक छोटे लाल प्रजापति ने वीडियो पर सफाई दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि अधिकांश निरीक्षण केवल औपचारिकता होते हैं। निरीक्षण से पहले जेल स्टाफ पूरी तैयारी करता है, जिससे अंदर चल रही गैरकानूनी गतिविधियां कभी उजागर नहीं हो पातीं।

जनता और सामाजिक संगठनों की मांग वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच की जाए।दोषी जेल अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही हो।जेल प्रशासन की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच हो।जेल में मादक पदार्थ, मोबाइल और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगे।


यदि जेलें अपराधियों के लिए विश्रामगृह बन जाएं, तो समाज में अपराध को बढ़ावा मिलना तय है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाए और जेलों को अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनने से रोके

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