गौ सेवा में समर्पित हृदयों को मिली बड़ी जिम्मेदारी — वैष्णो निस्वार्थ गौ सेवा समिति को सौंपी गई मारुताल की गौशाल।डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर दादा भाई
1 min read
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|

गौ सेवा में समर्पित हृदयों को मिली बड़ी जिम्मेदारी — वैष्णो निस्वार्थ गौ सेवा समिति को सौंपी गई मारुताल की गौशाल।डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर दादा भाई
दमोह जिले की धरती पर एक बार फिर गौ सेवा की मिसाल पेश की गई है।
ग्राम पंचायत मारुताल में नगर पालिका द्वारा विधायक निधि से निर्मित गौशाला को अब वैष्णो निस्वार्थ गौ सेवा समिति को सौंप दिया गया है।

यह वही गौशाला है जिसका भूमि पूजन वर्षों पहले बागेश्वर धाम के पूज्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी के पावन हाथों से किया गया था।
25 लाख रुपये की लागत से विधायक श्री अजय टंडन द्वारा इस गौशाला का निर्माण कराया गया था। निर्माण पशुपालन विभाग की जमीन पर हुआ, और संचालन ग्राम पंचायत मारुताल के सुपुर्द कर दिया गया।

लेकिन बीते वर्षों में जिस संगठन ने गौ सेवा को नई पहचान दी — वो है वैष्णो निस्वार्थ गौ सेवा समिति, जिसकी शुरुआत दमोह के पुराने थाने में कुछ युवाओं ने घायल व बीमार गौ माताओं की सेवा से की थी।

एक्सीडेंट हो, कोई बीमार गाय या लावारिस गौ माता…
आज पूरे जिले में जब भी ऐसी किसी पीड़ा की खबर मिलती है, लोग कहते हैं – “पुराने थाने वालों को बुलाओ, वो गौ माता को ठीक कर देंगे।”
समिति के सदस्यों की निस्वार्थ सेवा, समर्पण और भक्ति ने जिले के प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान खींचा।
दमोह विधायक जयंत मलैया, पशुपालन मंत्री लखन पटेल और स्वयं दमोह कलेक्टर कोचर ने गौशाला का कई बार निरीक्षण कर हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

समिति के कार्यों की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि अब इनकी गौशाला में घायल गायों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इसी को ध्यान में रखते हुए दमोह कलेक्टर ने पंचायत से समन्वय कर मारुताल की इस बड़ी गौशाला को समिति को सौंपने का निर्णय लिया।

आज विधिवत पूजा-अर्चना के साथ समिति ने इस गौशाला का संचालन संभाल लिया है।
दीपक नेमा, सत्यम चौरसिया समेत दर्जनों गौ सेवकों ने पूजा कर इस सेवा कार्य की शुरुआत की।
अब यहां बीमार, घायल, लावारिस और असहाय गौ माताओं की सेवा पहले से बेहतर तरीके से होगी।यह सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, गौ भक्तों की भक्ति का सम्मान है।यह सेवा है, श्रद्धा है, और सच्चे अर्थों में “गौ माता की गोद में लौटने” जैसा है।
राधे-राधे बोलो — गौ माता की सेवा में जो लगा, उसका जीवन सफल हो गया।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space






