कलेक्टर कोचर की ‘स्वच्छ–सुंदर दमोह’ पहल पर सियासी रंग, छात्रों के कैनवास पर राजनीतिक लिखावट से उठे सवाल!
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कलेक्टर कोचर की ‘स्वच्छ–सुंदर दमोह’ पहल पर सियासी रंग, छात्रों के कैनवास पर राजनीतिक लिखावट से उठे सवाल!
दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर की पहल पर जिले को स्वच्छ दमोह–सुंदर दमोह बनाने के लिए लगातार अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में शहर के प्रमुख स्थानों पर स्थित शासकीय भवनों एवं बाउंड्री वॉल पर डेंटिंग–पेंटिंग के स्थान पर चित्रकला कृतियां बनवाने की सराहनीय योजना शुरू की गई थी, ताकि शहर की सुंदरता बढ़े और स्थानीय कला को मंच मिले।

इस पहल की सबसे खास बात यह थी कि इन दीवारों को दमोह के छात्र–छात्राओं के लिए कैनवास के रूप में विकसित किया जा रहा था। जिला प्रशासन द्वारा दीवारों की साफ-सफाई और सफेद रंग से पुताई कर उन्हें विधायक पेंटिंग प्रतियोगिता, दमोह के अंतर्गत छात्रों के लिए तैयार किया गया था, ताकि बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें और शहर को नई पहचान मिल सके।

लेकिन इस सकारात्मक और रचनात्मक प्रयास पर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब कुछ राजनीतिक लोगों द्वारा 5 तारीख को प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए इन्हीं दीवारों पर राजनीतिक लिखावट और पेंटिंग कर दी गई। बताया जा रहा है कि यह कार्य बिना किसी शासकीय अनुमति के किया गया, जबकि इन दीवारों पर हुआ खर्च जिला प्रशासन द्वारा वहन किया गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन दीवारों पर छात्रों द्वारा बनाई गई चित्रकला संरक्षित रहती, तो स्वच्छता सर्वेक्षण में दमोह को अतिरिक्त अंक मिल सकते थे।

इसके बजाय नियमों की अनदेखी करते हुए दीवारों को राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बना दिया गया, जिससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित हुई, बल्कि प्रशासन की मंशा पर भी पानी फिर गया।

इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों और कला प्रेमियों में नाराजगी है। लोगों ने जिला प्रशासन से निवेदन किया है कि नियम विरुद्ध राजनीतिक लिखावट करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे रचनात्मक प्रयासों को नुकसान न पहुंचे और छात्रों को उनका हक मिल सके।यह मामला अब केवल दीवारों के रंग का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पहल, छात्रों की प्रतिभा और शहर की छवि से जुड़ा हुआ बन गया है।
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