बुराई पर अच्छाई की जीत होली का पर्व को लोगों ने बनाया यादगार! डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर
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हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए अपने आप को शक्तिशाली बनाने के लिए उसने सालों तक तपस्या की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और प्रजा से खुद को भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा।

इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया।

उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी ऐसा उसको बरदान था। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, इसलिए होली का त्योहार, होलिका की मौत की कहानी से जुड़ा हुआ है। इसके चलते भारत के सभी राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है।

ऐसे ही बुराई के अंत के लिए आज दमोह के कई युवाओं ने होलिका दहन के दिन को यादगार बनाने के लिए युवाओं द्वारा होली की प्रतिमा को मार्क्स लगाया और साथ में पहलाद को भी मार्क्स लगाया मार्क्स सेनिटाइजर भीऔर सेल्फी खिंचा कर इस त्यौहार को यादगार बना लिया! महिलाओं ने भी पूजा अर्चना के बाद होली की आग लेकर घर आकर मलिए जलाकर उस पर गक्कड़ बनाकर पूजा की गई हिंदू परंपरा अनुसार मान्यता है कि होलिका दहन की आग घर में लाने से धन धान की कोई कमी नहीं रहती और होली की आग में बुरी नजर समाप्त हो जाती है
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