मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों के लिए कायाकल्प पुरस्कार की घोषणा के बाद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के जायजे के लिए निकली टीम! डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर
1 min read
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|

मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों के लिए कायाकल्प पुरस्कार की घोषणा के बाद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के जायजे के लिए निकली टीम!
मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर प्रभु राम चौधरी द्वारा प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए कायाकल्प पुरस्कार की घोषणा के बाद दमोह जिला अस्पताल में अचानक से ही कायाकल्प में लगे कर्मचारियों की सक्रियता आज दिखाई दी इससे टीम आने की दहशत समझे या पुरस्कार जीतने का खेल दमोह चिकित्सालय में पिछले कई दिनों से इलाज कराते मरीजों से जब हमारी टीम ने चर्चा की तो उन्हें भी यह आश्चर्यजनक साफ सफाई

और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भोचक्के नजर आए उनका कहना था कि जहां पिछले दिनों दमोह जिला अस्पताल में मरीजों को खाना बांटने वाले व्यक्ति हाइजीन का ध्यान नहीं रख रहे थे लोगों को बगैर मार्क्स और ड्रेस के खाना बांटते नजर आ रहे थे और अस्पताल के टॉयलेट में साफ सफाई तो दूर की बात है वहां पर बैरिकेड कर दिए गए थे जिससे अस्पताल में मरीज और उनके परिजनों को टॉयलेट तक जाने के लिए मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा था!

दमोह जिला चिकित्सालय की एक और कारगुजारी से आपको रूबरू कराते हैं डेंगू मलेरिया और मच्छर से काटने से अन्य बीमारियों से बचाने के लिए दमोह जिला चिकित्सालय की खिड़कियों में जाली लगवाने का आर्डर दिया गया था जो कि पूरा हो गया और उसकी पेमेंट भी निकाल ली गई लेकिन तस्वीर कभी झूठ नहीं बोलती

आप भी देख सकते हैं कि खिड़की में जो जाली लगाई गई है क्या उससे मच्छरों को आने से रोका जा सकता है! जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि भले ही दमोह जिला अस्पताल मैं जो आज साफ सफाई और बढ़िया मैनेजमेंट दिखाई दे रहा है अगर यह मैनेजमेंट साल के 365 दिन और सप्ताह के सातों दिन मिले तो जनता को कुछ राहत मिलेगी शासन का यही उद्देश्य है इसी के लिए प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों के लिए कायाकल्प पुरस्कार देने जा रही है लेकिन यह योजना मात्र पुरस्कार पानी तक सीमित ना रहे इसकी भी देखरेख सरकार को करनी चाहिए टीम बनाकर अपना कर्तव्य निभाने की जगह जिले के और क्षेत्र के नगर वासियों से भी इस मामले में राय लेना चाहिए सरकार को उसके बाद ही उन अस्पतालों को पुरस्कार देना चाहिए ताकि सरकारी अस्पतालों की हालत सुधर सके

दमोह जिला अस्पताल को एनजीओ और समाजसेवियों द्वारा दिए गए मेडिकल उपकरण आज स्टोर रूप में धूल फाकते नजर आ रहे हैं उसके बावजूद भी एनजीओ और सरकार और समाजसेवियों द्वारा जिला अस्पताल को दी जा रही सौगातो पर किसी का नियंत्रण और ध्यान नहीं है जिससे जिला अस्पताल के मैनेजमेंट पर कोई असर नहीं पड़ता जिला अस्पताल को दिए गए उपकरणों का सही इस्तेमाल कराए जाने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी का गठन भी होना चाहिए ताकि अस्पताल को दिए जाने वाले उपकरण लोगों के काम आ सके

दमोह जिला चिकित्सालय में जहां पीने के पानी के लिए लोगों को बाहर जाना पड़ रहा है और वही वार्ड में बने महिलाओं और पुरुष के लिए फ्रेश होने के लिए व्यवस्था बनाई गई है लेकिन फ्रेश होने की व्यवस्था में भी ताले डाले गए हैं जहां लोग लाखों रुपए के कीमती जेवरातो पर ताले डालते हैं वहीं

दमोह चिकित्सालय की टॉयलेट में ताले डाले जाने से यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि जिला अस्पताल में टॉयलेट भी एक बहुमूल्य वस्तु है जिसकी रक्षा के लिए टॉयलेट में ताले डाले गए हैं मरीजों का तो यह कहना भी है कि यह वीआईपी लोगों को ही यहां एंट्री मिलती है या तो जिला अस्पताल के टॉयलेट बहुमूल्य है या वी आई पी ओ के लिए तालाबंदी की गई है
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space






