कार्तिक मास के पावन पर्व पर कृष्ण की नगरी वृदावन में मची पंडा और पुलिस प्रशासन की लूट और प्रदेश प्रशासन की आंखें बंद।
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कार्तिक मास के पावन पर्व पर कृष्ण की नगरी वृदावन में मची पंडा और पुलिस प्रशासन की लूट और प्रदेश प्रशासन की आंखें बंद।
कार्तिक मास में लोग दान और धर्म कर पुन्य कमाने में लगे हुए है श्रद्धालु भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन होकर धर्म लाभ लेने के लिए उनकी नगरी मथुरा वृंदावन में दर्शन का लाभ लेने आए हैं तो प्रशासन भी इसमें अपना लाभ देख रही है और जनता को परेशान कर पंडो द्वारा लुटवाया जा रहा है और प्रशासन द्वारा भी जनता को परेशान किया जा रहा है यहां पर ना तो जनता के लिए प्रशासन द्वारा कोई पूछताछ केंद्र की सुविधा है ना ही दिशा सूचक निशान बनाए गए हैं जिससे जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

vip दर्शनों की विशेष व्यवस्था है जिसमें पर व्यक्ति पांच सौ रुपए लिए जा रहे हैं अब जनता परेशान हैं तो भला वह पैसे क्यों ना दे लेकिन गरीब भक्तों का क्या जो इनकी उगाई के चलते परेशान हो रही है प्रेम मंदिर में भी बेरीकेट्स लगा दिए गए और मंदिर के बाजू से vip एंट्री कराई जा रही है प्रेम मंदिर से पांच से चार किलोमीटर दूर बने बांके बिहारी मंदिर जाने के लिए बुजुर्ग और हैंडीकैप लोगों को ई रिक्शा भी अंदर जाने नहीं दिया जा रहा ।

प्रशासन द्वारा प्रेम मंदिर में ही रोक लिया जा रहा वहीं पुलिस के दलाल लगे हैं शार्टकट में दर्शन कराने के लिए पर व्यक्ति ₹500 लिए जा रहे हैं और गोवर्धन परिक्रमा में ऑटो चालक भीअपनी मनमानी कर रहे हैं बुजुर्ग और बच्चों से 500 से हजार रुपए परिक्रमा के नाम पर लिए जा रहे हैं मंदिर प्रांगण की परिक्रमा करते समय भक्तों को भारी गंदगी का भी सामना करना पड़ रहा है बांके बिहारी लाल जी के मंदिर में प्रवेश पाने के लिए थाने से कुछ ही दूर पहले पुलिस के और मंदिर प्रबंधक के दलाल लगे हुए हैं जो भक्तों को दर्शन कराने के ऐवज में पैसे ले रहे हैं ।और भक्तों को परेशानी हो इसलिए गलत मार्ग दिखा देते हैं जिससे भक्त भटक रहे हैं और इनके दलाल पैसे लेकर पैसे वालो को दर्शन करा रहे हैं
बांके बिहारी मंदिर के दर्शन जहां गरीब व्यक्ति पांच से 6 घंटे में कर पा रहा हैं तो इनके दलाल मात्र 10 मिनट में ही पैसा लेकर दर्शन करा देते हैं अब देखना होगा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के शासन पर कब तक ध्यान देते हैं और ऐसे भृष्ट कर्मचारियों को यहां के मंदिर प्रबंधक से अलग कर देना चाहिए ताकि भक्तों को निस्वार्थ भाव से और सरल तरीके से दर्शन का लाभ मिल सके और यहां होने वाली अव्यवस्थाएं दूर हो सके। भक्तों द्वारा एक पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा गया है इस संबंध में।
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