सूत्रों के हवाले से खबर दमोह सिटी कोतवाली में वरिष्ठ पत्रकार को थाने में ना आने देने की समझाइश।
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सूत्रों के हवाले से खबर दमोह सिटी कोतवाली में वरिष्ठ पत्रकार को थाने में ना आने देने की समझाइश।
दमोह के कुछ वरिष्ठ पत्रकार दिन में 20 बार थाने जाते हैं और 25 बार एसपी ऑफिस यही वजह है कि दमोह सिटी कोतवाली में वरिष्ठ पत्रकार को घुसने से मना किया गया जब उसने बोला कि थाना सरकारी है मैं आऊंगा तो उसे पुंगा से मारने एवं सरकारी काम में बाधा जैसे कानूनों के अंतर्गत अंदर कर देने की बात कही गई कुछ वरिष्ठ पत्रकार नारद मुनि की भूमिका निभाते रहते हैं जोकि गलत है।

नारद मुनियों को कुछ पत्रकार अपना आदर्श मानते हैं जबकि यह गलत बात है वह एक नारद देवता है भगवान हैं जिन्हें कुछ लोग चुगल खोर के जैसे दिखाते हैं और चुगल खोर मानते हैं जबकि नारद मुनि एक ज्ञाता और ब्रह्मा के पुत्र हैं। कुछ राजनीतिक दल भी पत्रकारों को चुगल खोर मानते हैं और उन्हें नारद मुनि जैसे सम्मान से नवाजे जाते हैं और वह पत्रकार अपने आपको नारद मुनि अवार्ड लेकर कृतज्ञ धन्य मानकर और गर्व महसूस करते हैं जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए नारद मुनि अवार्ड देकर एक तरह से वह पत्रकारों का मजाक ही उड़ाते है। तो अब पत्रकारों को भी समझ जाना चाहिए कि आप ब्रह्मा के पुत्र और ध नारद मुनि की तरह भगवान हैं। ना आप किसी की चुगली करते हैं जो चुगल खोरी और दलाली करते हैं वह पत्रकार ऐसे अवार्ड से नवाजे जाने चाहिए। आप तो जनता के प्रति और पीड़ित व्यक्तियों के प्रति जवाब देह है बुराई के प्रतीक के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले योद्धा हैं जहां गलत होगा वहां पत्रकार खड़ा नजर आएगा अगर कोई योद्धा मानता है। और योद्धा अवार्ड दे तो यह अवार्ड लेना चाहिए अगर कोई पत्रकार को नारद मुनि की संज्ञा देता है तो वह आपको एक चुगलखोर मानता है इससे बचना चाहिए क्योंकि अभी तक सभी पत्रकारों ने नारद मुनि अवार्ड लेकर अपने आप को चुगल खोर की श्रेणी में रखा है जबकि पत्रकार एक दबंग और निर्भय निष्पक्ष होता है जो गलत के प्रति योद्धाओं की तरह सभी से लड़कर सत्य उजागर करता है

तो आप सब पत्रकार अपने आपको क्या चुगलखोर मानते हैं अगर नहीं मानते तो आज से नारद मुनि अवार्ड लेना बंद करें और जो भी नारद का आपको वंशज बताएं तो उन्हें जवाब दें कि पत्रकारिता एक बुराई के प्रति युद्ध है जो कि पत्रकार निरंतर लड़ता रहता है आजादी से पहले भी और आज भी। जो कुछ पत्रकार चुगली करते है वह पत्रकार आज के समय में एक प्रकार से झेलू ओर दलाल पत्रकारिता करता है और पत्रकार गुड़ जैसे मीठी होकर अपने काम बना लेते हैं और भगवान नारद की आड़ लेकर छुप जाते है। और कुछ पत्रकार आजकल इस प्रकार की भी पत्रकारिता कर रहे हैं कि अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता ?
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