दमोह जिला अस्पताल में सरकार द्वारा दी गई फैसिलिटी नहीं आ रही जनता के काम।
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दमोह जिला अस्पताल में सरकार द्वारा दी गई फैसिलिटी नहीं आ रही जनता के काम।
बड़ी बड़ी खबरों के बीच छूट जाती हैं छोटी महत्वपूर्ण खबरें जिन से होता है जनता का सीधा सरोकार छोटी महत्वपूर्ण खबरें देखने के लिए देखते रहे डेंजर भारत।

दमोह जी हां आपको बता दें कि सरकार द्वारा जिला अस्पताल के लिए यूं तो बहुत से ऐसे उपकरण दिए गए जो अस्पताल को बेहतर बना सके और जनता के काम में आ सके जिससे जनता को बेहतर इलाज मिल सके लेकिन जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा को सरकार द्वारा दी गई सभी सुविधाओं का जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा जो सरकार की मंशा अनुसार अस्पताल को मुहैया कराईं गई थी।

आपको बता दें कि दमोह जिला अस्पताल में लाखों रुपए की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया जो आज चालू नहीं है। और अस्पताल को मिले सोलर पैनल जिससे अस्पताल की विद्युत आपूर्ति पूरी हो सके उसको टीन सेट की मदद से ढक दिया गया उस सुविधा से ऑक्सीजन प्लांट चलाया जा सकता था आज जब डॉक्टर से पूछो कि ऑक्सीजन प्लांट क्यों बंद है तो वह बिजली खपत की बात कहते नजर आ रहे हैं लेकिन आपको बता दें कि सरकार ने बिजली बचाने और बिजली खपाने के लिए इन्हें जो सोलर पैनल मुहैंया कराया था उसकी तो यह पहले ही वाट लगा चुके हैं।

दमोह जिले के समाजसेवी एवं एनजीओ द्वारा कुछ दिन पहले जिला अस्पताल को २६ लाख रुपए के मेडिकल उपकरण मुहैया कराए गए थे जो अस्पताल के किसी कमरे में धूल फांक रहे हैं उन सुविधाओं का भी जनता को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। दमोह सांसद प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा दमोह में 15 बेड का आईसीयू वार्ड चालू कराया गया था जोकि आज मात्र ६ बेड वाला बना कर रखे हुए हैं और मात्र इस आईसीयू में ६ से ज्यादा मरीज नहीं लिए जाते जनता की जान जाए तो जाए भला डाक्टरों को इससे क्या मतलब उन्हें तो सरकारी मिले सामानों का सत्यानाश करना है बीते दिनों दमोह में हुई एक चाकू बाजी में एक युवक रात 8:00 बजे से करीब 11:00 बजे तक जिला अस्पताल में ऑक्सीजन के सहारे रहा उसे वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया यही वजह थी कि उसे जबलपुर ले जाते समय उसकी रास्ते में मौत हो गई।

अभी भी आप अस्पताल में जाकर देख सकते हैं कि कई मरीज जो ऑक्सीजन की हाई स्पीड में भर्ती हैं जिन्हें वेंटिलेटर की सख्त जरूरत है उसके बावजूद भी उन्हें वेंटिलेटर पर नहीं रखा जा रहा हाई स्पीड ऑक्सीजन पर भर्ती किए हैं जनरल वार्ड में जबकि सरकार द्वारा १५ पलंग का वेंटीलेटर अस्पताल मात्र पलंग में तब्दील कर दिया गया है। जिला अस्पताल में सीरियस मरीज को कैजुअल्टी से सीधा हाई ऑक्सीजन पर वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है।

इस संबंध में जब हमने डॉ विशाल शुक्ला से बात की तो उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए अपनी सारी गलतियां सरकार पर मढ़ दी।

अब इस संबंध में दमोह के जनप्रतिनिधियों को भी सोचना चाहिए कि सरकार द्वारा दमोह जिला अस्पताल को जितनी भी फैसिलिटी दी जा रही हैं उनका लाभ जनता क्यों नहीं ले पा रही ??????
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