चार बेटियों को अनाथ कर देने वाली महिला डॉक्टर पर कानून का कसा शिकंजा। घर में बने फर्जी नर्सिंग होम में गई थी जच्चा-बच्चा की जान।
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चार बेटियों को अनाथ कर देने वाली महिला डॉक्टर पर कानून का कसा शिकंजा। घर में बने फर्जी नर्सिंग होम में गई थी जच्चा-बच्चा की जान।
दमोह जिले के अभाना ग्राम के पास अमखेरा गांव निवासी गीता बाई लोधी पिछले तीन चार वर्ष पहले दमोह में अवैध नर्सिंग होम संचालित करने वाली डॉक्टर हनसा वैष्णो के क्लीनिक पर पहुंची तो डॉक्टर हनसा वैष्णो द्वारा उन्हें नॉर्मल डिलीवरी कराने का लालच दिया गया और उन्हें बताया गया कि हमारे नर्सिंग होम में बगैर ऑपरेशन की डिलीवरी कराई जाती है आप अगर किसी और डॉक्टर के यहां जाएंगे तो वह आपका ऑपरेशन कर डिलीवरी करवा देंगे।

ऑपरेशन के डर से महिला फर्जी डॉक्टर के झांसे में आ गई डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। आपको बता दें कि पीड़ित महिला की पहले से 4 बच्चियां थी महज एक बेटे को पाने की लालच में मां ने 5,वीं डिलीवरी का निर्णय लिया था उसे नहीं मालूम था कि यह फर्जी डॉक्टर उसकी चार बेटियों को अनाथ कर देगी। महिला के खत्म हो जाने के कुछ साल बाद बताया जा रहा है कि उसके पति भी आकाशी बिजली गिरने से स्वर्ग सिधार गए से जिससे यह चारों बेटियां अनाथ हो गई है।

इस पूरी घटना से महिला के रिश्तेदार और समाज के लोग काफी आक्रोश में है उनका कहना है की इतना जघन्य अपराध कर देने वाली फर्जी डॉक्टर का राजनीतिक लोग सहयोग कर रहे हैं उन्हें भगवान कभी माफ नहीं करेगा। इस घटना के बाद उन दिनों लोधी समाज में काफी आक्रोश देखा गया था और विधानसभा में भी गुंजा था। दमोह के फर्जी नर्सिंग होम का मामला अब अदालत द्वारा डॉक्टर को सजा मिली है तो उनकी चारों बेटियों में जहां थोड़ी खुशी है तो बहुत सी नाराजगी भी है क्योंकि फर्जी डॉक्टर का साथ कुछ राजनीतिक लोग और दमोह अस्पताल के डॉक्टर दे रहे हैं। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद डॉक्टर द्वारा उन्हें बीमार बताकर फर्जी तरीके से जिला अस्पताल में भर्ती किए जाने से परिवार दुखी नजर आ रहा है।

झोलाछाप डॉक्टर की अवैध नर्सिंग होम मैं डिलेवरी कराने पर झोलाछाप महिला डॉक्टर को 5 साल की कैद दमोह जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेणुका कंचन ने एक झोलाछाप महिला डॉक्टर जो डॉक्टर न होने के बावजूद घर में बने नर्सिंग होम मैं डिलेवरी कराने के मामले में 5 साल का कारावास व 50 हजार रुपए जुर्माना की सजा से दंडित किया है । लोक अभियोजक मुकेश जैन ने बताया कि करीब तीन साल पहले दमोह में अजाक थाना के सामने स्थित निवासी हंसा वैष्णव ने डॉक्टर न होने के बावजूद एक गर्भवती महिला की अपने घर पर ही डिलेवरी कराई थी । डिलेवरी के बाद महिला की मौत हो गई थी । इस मामले को लेकर महिला के परिजनों द्वारा कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी ।

पुलिस द्वारा मामले की जांच के बाद आरोपी महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया । न्यायालय द्वारा इस मामले में आए साक्ष्य अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्क से सहमत होकर महिला डॉ . हंसा वैष्णव को दोषी मानते हुए सजा सुनाई । मामले में शासन की ओर से पैरवी लोक अभियोजक मुकेश जैन ने की ।
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