पत्रकारों पर सवाल उठाने वाले जरूर पढ़ें इस रिपोर्ट को।
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पत्रकारों पर सवाल उठाने वाले जरूर पढ़ें इस रिपोर्ट को।
जब भी शासन प्रशासन एवं नेता जनता की बात नहीं सुनते तो जनता के पास सिर्फ एक ही विकल्प रह जाता है मीडिया अब मीडिया पर भी सवाल उठाने वाले यूट्यूब एवं फेसबुक पर लिखने वालों के लिए यह समाचार जरूर पढ़ें। उनकी आंखे खोल देने वाला होगा। आपको बता दें कि निष्पक्ष पत्रकारिता चाहने वाले लोग आए दिन पत्रकारों को फेसबुक एवं इंस्टाग्राम और कई प्लेटफार्म पर लिखते नजर आए होंगे उन सभी के लिए यह समाचार जरूर पढ़ना चाहिए।

जनहित की समस्याएं हो या राजनेताओं के संबंध में या पुलिस या सरकारी कार कार्यप्रणाली पर जब भी कोई सवाल उठता है तो उसे उजागर करने की जिम्मेदारी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर आ जाती है। जिसके बाद कई लोगों द्वारा सवालिया निशान खड़े किए जाते हैं लेकिन कोई भी समाजसेवी या जनक्रांति खड़ी नहीं होती जब कोई मीडिया कर्मी पर एफ आई आर दर्ज होती है। जबकि वह पत्रकार प्रदेश की जनता के सवाल प्रदेश सरकार से करता हैं तो प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के पत्रकार पर ही मुकदमा दर्ज किया जाता है जैसे कि बिहार के बेटे मनीष कश्यप ने जब तमिलनाडु की घटना को अपने यूट्यूब चैनल पर दिखाया तो मनीष कश्यप से पूछताछ की गई। बिहार आर्थिक अपराध थाना में तमिलनाडु वीडियो वायरल मामले में मनीष कश्यप पर कई मामले दर्ज किए गए और चार लोगों का नाम है उसमें मनीष कश्यप का भी है. आईपीसी की धारा-153, 153 (ए), 153 (बी), 505 (1) (बी), 505(1) (सी), 468, 471 एवं 120 (बी) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है. और तमिलनाडु पुलिस द्वारा एनएसए की कार्यवाही भी की गई है।

जुनेद नामक पत्रकार द्वारा कई बार फैक्ट चेक करने के नाम पर दो समुदाय में भड़काऊ पोस्ट का मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन सिस्टम को तथा बताते हुए कभी इनके ऊपर ऐसी कार्यवाही नहीं की गई। जैसी कार्यवाही मनीष कश्यप पर हुई।

बात करें मध्य प्रदेश दमोह जिले की तो यहां भी पत्रकारों को दबाने के नियत से कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं ऐसा ही उदाहरण दमोह सिटी कोतवाली में कई बार देखने को मिला है। जिसमें पत्रकार द्वारा जुआ खिलाने वाले दबंगों के खिलाफ खबर निकाले जाने पर जुआ माफियाओं को पत्रकारों का नंबर देकर जुआ माफियाओं द्वारा धमकी दिलाई जाती रही है। सिटी कोतवाली में पत्रकारों का आना प्रतिबंध लगा दिया गया। और दमोह सिटी कोतवाली द्वारा 100 में से मात्र 10 एफ आई आर दर्ज ही की जाती है अगर मामला किसी पत्रकार का हो तो तुरंत ही उस पर f.i.r. लिख ली जाती है। बगैर जांच पड़ताल के आपको बता दें कि अगर पत्रकार निष्पक्ष रुप से जनसमस्याओं को उठाता है तो नेताओं को लगता है कि यह हमारे खिलाफ है ऐसा ही पुलिस कर्मियों को भी लगता है कि यह पत्रकार हमारे खिलाफ है जिसका यह परिणाम होता है कि पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाते हैं बगैर जांच-पड़ताल के। ताकि वह शासन प्रशासन एवं सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ कुछ ना लिखें नहीं तो उनके ऊपर पुलिस बेधड़क होकर एफ आई आर दर्ज करती है। ऐसा ही कुछ दिन पहले मेरे साथ भी हुआ दो पक्षों में बीच-बचाव के दौरान मेरे द्वारा पुलिस कंट्रोल रूम को फोन लगाया गया जिस पर पुलिस दमोह सिटी कोतवाली द्वारा मेरे ऊपर 323 का मुकदमा दर्ज किया गया। जबकि दमोह सिटी कोतवाली में प्रतिदिन 10 से 20 f,i,r लिखी जाती है बाकी शिकायतें धारा 155 के तहत लिखी जाती है। और बाकी लोगों से तो महज आवेदन लेकर भगा दिया जाता है। कुछ दिन पूर्व पथरिया थाना में एक अधिमान्य पत्रकार पर
दो दिन पूर्व रामअवतार पाली के परिजनों का विवाद पड़ोस में ही रहने वाले विक्रम खटीक के साथ हो गया था , शराब के नशे में चूर विक्रम द्वारा बाद में निर्वस्त्र होकर मोहल्ले में हंगामा किया और पुलिस थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज की । जिस समय यह विवाद हुआ उस समय पत्रकार रामअवतार पाली घटना स्थल पर ही नहीं थे । इसके बावजूद थाना प्रभारी द्वारा मुख्य आरोपी के तौर पर रामअवतार का नाम लिख दिया गया , इस बात की सूचना थाना प्रभारी को भी दी गई थी लेकिन उन्होंने बिना संक्षम अधिकारी से जांच कराए बिना सीधा मुकदमा दर्ज कर दिया । आज सभी पत्रकारों ने सामूहिक रूप से एक आवेदन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपकर इस पूरे प्रकरण की जांच करने एवं पत्रकार रामअवतार पाली व उनके परिवार जनों पर जो झूठा मामला दर्ज किया है उसको खत्म करने की मांग की है ।

उल्लेखनीय है इसके पूर्व पथरिया के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश नामदेव की बाइक चोरी करके अज्ञात बदमाश भाग गए थे जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उपरोक्त वरिष्ठ पत्रकार को थाने के अनेक चक्कर लगाना पड़े थे । तथा चोरी गई बाइक की तलाश करने भी जगह – जगह भटकना पड़ा था अंत में गढ़ाकोटा थाना क्षेत्र से उनकी बाइक बरामद हुई थी लेकिन आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा था । इसी तरह पिछले दिनों पथरिया थाने में अवैध शराब पकड़वाने के लिए पहुंचे कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं करने पर से मामले की कवरेज कर रहे पत्रकारों के नाम अलग से नोट करने में भी पथरिया थाना पुलिस नहीं चूकी थी ।
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