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गरीबों पर बुलडोजर, रसूखदारों पर खामोशी: दमोह प्रशासन की दोहरी नीति सवालों के घेरे में।

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गरीबों पर बुलडोजर, रसूखदारों पर खामोशी: दमोह प्रशासन की दोहरी नीति सवालों के घेरे में

दमोह जिले में जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। जहां एक ओर गरीब, कमजोर और अस्थायी दुकानदारों की रोज़ी-रोटी पर बार-बार बुलडोजर चलाया जाता है, वहीं दूसरी ओर करोड़पति रसूखदारों द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जों पर प्रशासन खामोश बैठा दिखाई देता है।

 

वीडियो फुटेज में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि दमोह के शिखर कॉम्प्लेक्स, टंडन बिल्डिंग के सामने एक दुकान के बाहर अवैध रूप से पिलर खड़े किए जा रहे हैं और दुकान को 3 से 4 फुट आगे बढ़ाया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह निर्माण दिनदहाड़े किया गया है, और प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित दुकानदार प्रभावशाली और धनाढ्य वर्ग से है, जिससे प्रशासन की हिम्मत जवाब दे जाती है

वहीं दूसरी ओर, छोटे दुकानदारों—जो फुटपाथ पर चाय-पान की गुमटी या सब्जी की दुकानें लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं—उन्हें साल में कई बार उजाड़ा जाता है। “सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया गया” जैसे शब्दों की आड़ में गरीबों को हटाकर पेपर में वाहवाही लूटी जाती है, लेकिन करोड़ों की लागत से किए गए पक्के निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

दमोह के सिविल वार्ड क्रमांक 2 में शिवाजी स्कूल के पास का एक और मामला सामने आया है, जहां करोड़ों की जगह पर 3 फुट सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर सीढ़ियां बना ली गईं हैं। इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन आज तक नगर पालिका ने कोई कदम नहीं उठाया।

अब सवाल यह है:
क्या प्रशासन की सख्ती सिर्फ गरीबों के लिए आरक्षित है?
क्या रसूखदारों पर कार्रवाई से कलेक्टर और नगर पालिका के हाथ कांपते हैं?
क्या दमोह में कानून सबके लिए बराबर है?

डेंजर भारत न्यूज़ प्रशासन से यह मांग करता है कि इन वीडियो और शिकायतों को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए और एक समान नीति अपनाई जाए। वरना जनता का भरोसा प्रशासनिक तंत्र से उठ जाएगा।

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