दमोह जिला अस्पताल में गोरखधंधा! फर्जी मरीजों के नाम पर पलंगों की खरीद-फरोख्त — जनप्रतिनिधि मौन दमोह।
1 min read
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|

दमोह जिला अस्पताल में गोरखधंधा! फर्जी मरीजों के नाम पर पलंगों की खरीद-फरोख्त — जनप्रतिनिधि मौन
दमोह।
दमोह जिला अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला बेहद चौंकाने वाला है — अस्पताल में फर्जी मरीजों को भर्ती दिखाकर पलंगों की खरीद-फरोख्त का गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है।
यह खुलासा तब हुआ जब एक मरीज कालू अहिरवार ने मीडिया के सामने बताया कि अस्पताल स्टाफ मरीजों से फाइल चालू रखने और पलंग दिलाने के नाम पर पैसे वसूल रहा है।

फर्जी भर्ती और पलंग व्यापार का खेल
जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में 350 मरीजों की क्षमता है, लेकिन रोजाना इससे कहीं अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस स्थिति का फायदा उठाकर अस्पताल के कुछ कर्मचारी फर्जी मरीजों की फाइलें चालू रखकर पलंग बेचने का धंधा चला रहे हैं।
सुबह डॉक्टरों के राउंड के बाद यदि कोई मरीज थोड़ी देर के लिए वॉर्ड से बाहर चला जाए, तो उसकी फाइल बंद कर दी जाती है।

फाइल चालू करने के लिए रिश्वत की मांग की जाती है। पैसे न देने पर मरीज को फर्श पर लिटा दिया जाता है और कहा जाता है कि “सारे पलंग भरे हैं” — जबकि कई पलंग फर्जी नामों पर पहले से ‘बुक’ रहते हैं।
रात में होता है असली सौदा
शाम ढलते ही यह गैरकानूनी कारोबार और तेज हो जाता है। जरूरतमंद मरीजों के परिजनों से पैसा लेकर, फर्जी मरीजों की बंद फाइलें हटाई जाती हैं और उनके पलंग बेच दिए जाते हैं।
यह पूरा खेल अस्पताल के अंदर ही स्टाफ की मिलीभगत से चल रहा है।
सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट क्लीनिक से भी कनेक्शन!
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई सरकारी डॉक्टर अपने प्राइवेट क्लीनिक के मरीजों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाते हैं, ताकि उन्हें फ्री दवा और पलंग मुहैया हो सके।
इन मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि गरीब और दूरदराज से आए जरूरतमंद लोग फर्श पर पड़े रहते हैं।
जनप्रतिनिधि और प्रशासन पर सवाल
दमोह के जनप्रतिनिधि, जो आए दिन जिला अस्पताल का दौरा करने की बात करते हैं, इस पूरे भ्रष्टाचार पर मौन हैं।
जनता पूछ रही है

क्या जनप्रतिनिधियों की आंखों पर पट्टी बंधी है?
क्या जिला अस्पताल भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है?
कब होगी इस गोरखधंधे की निष्पक्ष जांच?
जनता की आवाज़
दमोह के लोगों का कहना है कि “अब जिला अस्पताल में मरीज नहीं, बल्कि पैसा इलाज तय करता है।”
Danger Bharat News की टीम इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही इस पर और बड़े खुलासे करेगी।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space



