दमोह कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान फिर गूंजा दमोह जेल में भ्रष्टाचार का मामला! दमोह।
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दमोह कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान फिर गूंजा दमोह जेल में भ्रष्टाचार का मामला!
दमोह।
दमोह जिला जेल में भ्रष्टाचार के मामले एक बार फिर चर्चा में हैं। मंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक महिला ने जेल में चल रहे कथित भ्रष्टाचार और वसूली की शिकायत कलेक्टर के समक्ष रखी।
आवेदिका गिरजा अहिरवार, जो वर्तमान में भिंड में रहती हैं, ने बताया कि उनका बेटा राज अहिरवार कटनी से दमोह पुलिस द्वारा चोरी के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेल में बंद है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में उनके बेटे के साथ मारपीट की जा रही है और मुलाकात करवाने के एवज में पैसों की मांग की गई। गिरजा अहिरवार ने कहा कि

“जेल गेट पर मुलाकात करवाने वाली मैडम के कहने पर ₹1200 देने पड़े, ताकि मेरे बेटे को जेल के अंदर कोई परेशान न करे।”
उन्होंने अपने लिखित आवेदन में यह भी कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज की जाए ताकि उनके बेटे को न्याय मिल सके।
जेल में भ्रष्टाचार के पुराने आरोप फिर चर्चा में
यह कोई पहला मौका नहीं है जब दमोह जेल में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हों।

करीब एक वर्ष पहले, उड़ीसा के एक कैदी से ₹15,000 प्रोटेक्शन मनी फोनपे के ज़रिए ली गई थी। जब मामला मीडिया में आया तो जेल प्रशासन ने इसे “गलती से हुआ ट्रांजेक्शन” बताकर पैसे लौटा देने की बात कही थी।
पिछले महीने, एक अन्य उड़ीसा के बंदी के परिजन से ₹4,000 एक जेल प्रहरी के भाई के खाते में लिए जाने का मामला सामने आया था, जिसकी शिकायत सागर जेल प्रबंधन तक की गई है।

शराब की खाली बोतलें और सुरक्षा पर सवाल
साल 2023 में, जेल परिसर से सटे उत्कृष्ट माध्यमिक शाला की प्राचार्य व छात्राओं ने कलेक्टर को लिखित शिकायत दी थी कि जेल से शराब की खाली बोतलें हॉस्टल परिसर में फेंकी जाती हैं।
डेंजर भारत न्यूज़ की टीम ने जब प्राचार्य और छात्राओं से बात की तो उन्होंने कहा कि —
“शिकायत के बाद भी आज तक जेल की ओर से बोतलें फेंकने का सिलसिला बंद नहीं हुआ है। किसी दिन यह किसी के सिर पर गिरकर बड़ा हादसा करा सकती हैं।”
जेल प्रशासन का पक्ष
जब डेंजर भारत न्यूज़ ने जेलर छोटेलाल प्रजापति से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने कहा —

“हमें इस मामले की अभी कोई जानकारी नहीं है। आपके द्वारा बताया गया हैं! जांच करता हूं जांच में यदि तथ्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”
दमोह जेल में इस तरह के मामले बार-बार उठने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस बार शिकायतों पर कितनी गंभीरता से जांच कर कार्रवाई करता है।
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