दमोह में सट्टेबाज़ी पर सवाल: बड़े खेल पर खामोशी, छोटे लोगों पर कार्रवाई!
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दमोह में सट्टेबाज़ी पर सवाल: बड़े खेल पर खामोशी, छोटे लोगों पर कार्रवाई!
दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में इन दिनों क्रिकेट के महाकुंभ कहे जाने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान सट्टेबाज़ी को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जहां एक ओर आईपीएल मैचों पर रोजाना लाखों-करोड़ों रुपये के दांव लगाए जा रहे हैं, वहीं पुलिस इन बड़े सटोरियों तक पहुंचने में नाकाम नजर आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, शहर में सक्रिय सट्टेबाज़ खुलेआम आईपीएल मैचों पर बड़ी रकम का खेल कर रहे हैं, लेकिन दमोह सिटी कोतवाली पुलिस अब तक किसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम नहीं दे सकी हैं। इससे आम लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इन बड़े नेटवर्क्स पर शिकंजा क्यों नहीं कसा जा रहा।

वहीं दूसरी ओर, शहर के टॉकीज चौराहा और बहराम टॉकीज के आसपास, खासकर एक खुले कुएं के पास, छोटे स्तर पर होने वाले जुआ 10-20 रुपये का जुआ खेलने वाले गरीब तबके—जैसे ऑटो चालक और रेहड़ी-पटरी वाले—पुलिस की सख्त कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। बताया जाता है कि यहां पुलिस दिन में कई बार छापेमारी कर रही है, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर ये कार्रवाई होती है, वहां एक खुला कुआं भी मौजूद है, जिससे पुलिस की छापा मार कार्यवाही में पुलिस से बचने के लिए लोग भागते हैं जिससे कभी भी कुएं में गिरकर किसी की मौत की आशंका बनी हुईं है।

इसके बावजूद पुलिस की लगातार कार्रवाई को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। छोटे लोगों पर 1,3,26 को सिटी कोतवाली पुलिस ने चार लोग पकड़े और ₹1100 की जप्ती की तो वही दूसरे दिन ही 3,3,26को दोबारा से फिर उसी जगह पर पुलिस ने पांच लोग पकड़े और ₹1000 की जप्ती की छोटे लोगों पर हर दूसरे दिन पुलिस
सख्ती दिखाकर पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि बड़े सट्टेबाज़ अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।

अब देखना यह होगा कि दमोह पुलिस आईपीएल के नाम पर चल रहे इस बड़े सट्टा कारोबार पर कब तक प्रभावी कार्रवाई करती है, या फिर कार्रवाई का दायरा यूं ही छोटे और गरीब तबके तक सीमित रहेगा।
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