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दमोह जेल में फिर कैदियों से वसूली का खेल, शराब पीते बंदी का वीडियो वायरल!

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दमोह जेल में फिर कैदियों से वसूली का खेल, शराब पीते बंदी का वीडियो वायरल!

बड़ी-बड़ी खबरों के बीच छूट जाती है छोटी महत्वपूर्ण खबरें जिनसे होता है जनता का सीधा सरोकार छोटी महत्वपूर्ण खबरें देखने के लिए देखते रहे डेंजर भारत 7000412524(तनुज पाराशर दादा भाई)


दमोह। जिला जेल दमोह एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पहले से ही बंदियों से सुविधा दिलाने के नाम पर पैसों की वसूली के आरोपों में घिरी जेल प्रशासन की छवि अब शराब पीते एक कैदी के वीडियो के वायरल होने से और भी संदिग्ध हो गई है।
स्थानीय चैनलों पर प्रसारित वीडियो में एक बंदी जेल की दीवार के पास शराब पीता नजर आया और उसने खुलेआम यह कहते हुए आरोप लगाए कि “दमोह जेल में पैसे से सब कुछ मिलता है।” इस बयान ने जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।


हालांकि जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक सी.एल. प्रजापति ने वीडियो को षड्यंत्र बताते हुए इसे जेल की छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि वीडियो जेल के अंदर का नहीं है और जिस शख्स को दिखाया जा रहा है, वह पहले ही जेल से रिहा हो चुका है। जेलर ने यह भी तर्क दिया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति टी-शर्ट पहने है जबकि जेल में केवल कुर्ता और टोपी पहनना अनिवार्य है।


लेकिन जेल सूत्रों और मीडिया में आए साक्ष्यों से कहानी कुछ और ही बयां होती दिख रही है। पहले भी समाचारो की सुर्खियों मे  एक और मामला उजागर हुआ था, जिसमें जेल प्रहरी पर कैदियों से वसूली का गंभीर आरोप है। बताया गया कि उड़ीसा के एक कैदी को यातना न देने और “सुविधाएं” दिलाने के नाम पर उसके परिजनों से फोन पे के माध्यम से 15,000 रुपये की रकम जेल प्रहरी बृजेश साहू के खाते में ट्रांसफर करवाई गई।
मीडिया में वसूली का यह स्क्रीनशॉट वायरल होते ही संबंधित परिजन असीम दास ने रकम भेजने की बात से इनकार कर दिया। लेकिन यह इनकार भी इस तथ्य को छिपा नहीं सका कि कैदियों और प्रहरियों के बीच पैसों का खेल लंबे समय से जारी है।


इस पूरे प्रकरण पर जब प्रभारी जेल अधीक्षक छोटेलाल प्रजापति से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
दमोह जेल में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले यह साबित कर रहे हैं कि अंदरूनी व्यवस्थाएं कितनी खोखली हैं। जेल प्रशासन भले ही हर बार आरोपों को सिरे से नकारता रहे, लेकिन वसूली और सुविधाओं के नाम पर चल रहे इस “कैश-केयर सिस्टम” ने जेल की विश्वसनीयता पर गहरी चोट की है। पिक्चर अभी बाकी है

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