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दमोह कलेक्टर की दिखाई दी दहशत दमोह कलेक्टर ने दिए खुले नलकूप को ढकने के आदेश। दहशत में लोगों ने तालाब ही कर दिया गायब।

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भीषण जल संकट के बीच पटेरा जनपद पंचायत के ग्राम कुंवरपुर में तालाब गायब।
मत्स्य विभाग के लाखों के दो तालाब गायब।

दमोह जिला में विकास के कार्य कागजों पर बदस्तूर चल रहे हैं। कागजों पर हितग्राही भी है कार्य भी हैं और कार्य का मूल्यांकन भी किया गया लेकिन मौके से कार्य नदारत है। ऐसा ही एक मामला दमोह जिले के पटेरा ब्लॉक में देखने को मिला जहां ग्राम पंचायत कुंवरपुर के ग्राम जामाटा में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो तालाब खोदे गए जिनकी लागत 21 लाख 50000 रुपए थी। डेंजर भारत के प्रतिनिधि ने जब मौके का मुआइना किया तो मौके पर ना तो तालाब मिले ना ही मछलियां। जिस जगह तालाब खुदा हुआ बताया गया वहां पर फसल लहलहा रही थी।

स्थानीय ग्रामीणों से पूछने पर पता चला कि फसल लगाने के लिए तालाब की मेड फोड़ दी गई है जिससे सारा पानी बह गया और अब वहां फसल लगी हुई है। जिस तालाब के लिए शासन ने मछली पालन के लिए अनुदान दिया हुआ था उस तालाब में आवेदको द्वारा खेती की जा रही थी। बात यहीं खत्म नहीं होती जब इस बात की सूचना जिला मत्स्य अधिकारी सुरेंद्र कुर्मी को दी गई तो जांच के नाम पर जिला मत्स्य अधिकारी द्वारा लीपा पोती की गई।

सरकार की मनसा अनुसार क्षेत्र में जल संकट ना हो और जमीन का वाटर लेवल भी ऊपर हो और रैकवार माझी समाज के लोगो को गरीबी से निजात मिल सके और रोजगार मिल सके।
इस मनसा से प्रधानमंत्री द्वारा अनुदान दिया गया लेकिन अनुदान का लाभ लेकर प्रशासन की मंशा को कोई लाभ नहीं मिलता दिखाई दे रहा है सरकार की योजना पर पलीता लगाते ऐसे कर्मचारियों पर भी सख्त कार्यवाही होनी चाहिए जो अधिकारी अपना दायित्व ना निभाते हुए अपने कृपा पात्र लोगों को फायदा दिलाते हैं और खुद भी फायदे में रहते हैं


आपको बता दें कि इस योजना के अंतर्गत रैकवार माझी समाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए लेकिन मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मिली भगत के चलते अपने कृपा पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत पटेरा के ग्राम कुंवरपुर में भरत पटेल और कृष्णा बाई पटेल के नाम पर दो तालाब जिनकी राशि 21 लाख 50 हैं इस तालाब के खोदे जाने में सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य योजना अंतर्गत 990000 अनुदान दिया गया है मौका स्थल पर तालाब कहीं दिखाई नहीं दे रहा बल्कि चारों ओर खेत हि खेत दिखाई दे रहे हैं।

मत्स्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा सरकारी अनुदान का लाभ दिलाने में योजना की किसी भी गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया बगैर गाइडलाइंस का पालन करते हुए अपने लोगों को फायदा दिलाने की जल्दबाजी दिखाई दी

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