दमोह में आवारा कुत्तों का आतंक! असाटी वार्ड में 10 से अधिक लोगों को काटने का आरोप, नगर पालिका के हेल्थ ऑफिसर ने कहा—टेंडर के बिना कुछ नहीं कर सकते!बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल, आखिर कब जागेगा नगर पालिका प्रशासन? कलेक्टर से तत्काल कार्रवाई की मांग
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बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल, आखिर कब जागेगा नगर पालिका प्रशासन? कलेक्टर से तत्काल कार्रवाई की मांग
दमोह। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। गली-मोहल्लों से लेकर प्रमुख चौराहों तक आवारा कुत्तों के झुंड घूमते दिखाई दे रहे हैं। कहीं राहगीरों पर भौंकने तो कहीं लोगों को काटने की घटनाओं से नागरिक परेशान हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब आवारा कुत्ते लोगों पर हमला करने लगें, तब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या नगर पालिका प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

दमोह के असाटी वार्ड क्रमांक-1 में पिछले दो दिनों के दौरान एक भूरे रंग के कुत्ते द्वारा 10 से अधिक लोगों को काटने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इनमें लगभग 5-6 बच्चे और इतने ही अन्य लोग शामिल हैं। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने वार्ड वासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों को डर सता रहा है कि कहीं इस कुत्ते के हमले का अगला शिकार कोई मासूम बच्चा न बन जाए।

शिकायतें होती रहीं, लेकिन जिम्मेदारों तक नहीं पहुंची जनता की आवाज!
स्थानीय जागरूक नागरिकों के मुताबिक, असाटी वार्ड में कुत्ते के हमले की घटनाओं के बाद नगर पालिका में फोन लगाकर शिकायत की गई। वार्ड पार्षद से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई बार फोन लगाने के बावजूद पार्षद से संपर्क नहीं हो सका। कुछ लोगों को फोन बंद होने की जानकारी मिली।
ऐसे में वार्ड के नागरिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आपात स्थिति में वे अपनी समस्या लेकर जाएं तो कहां जाएं? जब एक ही कुत्ते द्वारा लगातार कई लोगों को काटने की शिकायत सामने आ रही हो, तब तत्काल कार्रवाई करना प्रशासन की प्राथमिकता क्यों नहीं बन रहा?
हेल्थ ऑफिसर जावेद का कथित जवाब—टेंडर नहीं निकला, इसलिए मदद नहीं कर सकते!

इस मामले में नगर पालिका के स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ हेल्थ ऑफिसर जावेद खान से संपर्क किए जाने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़ने संबंधी कार्य के लिए टेंडर निकाला जाना है और टेंडर होने तक वे मदद नहीं कर सकते।
किसी नागरिक की जान की सुरक्षा भी टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करेगी?

टेंडर, बजट और प्रशासनिक प्रक्रिया अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जब किसी इलाके में एक कुत्ते द्वारा लगातार लोगों को काटने की शिकायत सामने आ रही हो, तब प्राथमिकता तत्काल सुरक्षा और उचित कार्रवाई होनी चाहिए। संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियों में आपात कार्रवाई की क्या व्यवस्था है और प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा नगर पालिका प्रशासन?
असाटी वार्ड के नागरिकों की चिंता केवल आवारा कुत्ते के घूमने तक सीमित नहीं है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो सकता है।
लगातार काटने की शिकायत के बाद संबंधित कुत्ते के व्यवहार की जांच और आवश्यक पशु चिकित्सा सहायता की व्यवस्था करना जरूरी है। हालांकि, केवल काटने की घटना के आधार पर किसी कुत्ते को रेबीज से संक्रमित या पागल घोषित नहीं किया जा सकता। इसलिए विशेषज्ञों की मदद से तत्काल स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।

सीएमओ से नहीं मिल सका पक्ष
मामले में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) से भी फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार, फोन लगातार व्यस्त आने के कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका। इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
कलेक्टर से नागरिकों की अपील—तत्काल हस्तक्षेप करें
असाटी वार्ड के नागरिकों ने दमोह कलेक्टर श्री यादव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और संबंधित विभाग को कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की है।

नागरिकों की मांग है कि कथित रूप से लोगों को काटने वाले कुत्ते के मामले में तत्काल विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जाए, घायलों को आवश्यक उपचार मिले और वार्ड में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दमोह नगर पालिका प्रशासन जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा, या नागरिकों को अपनी समस्या के समाधान के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ेगा?
जनता को आश्वासन नहीं, समय पर कार्रवाई चाहिए। क्योंकि प्रशासनिक व्यवस्था का असली उद्देश्य कागजी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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