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प्रशासन के विरुद्ध जाकर व्यापारियों को भड़काया अपनी राजनीति चमकाने के लिए व्यापारियों का किया इस्तेमाल अब व्यापारियों पर गिरेगी गाज।

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प्रशासन के विरुद्ध जाकर व्यापारियों को भड़काया अपनी राजनीति चमकाने के लिए व्यापारियों का किया इस्तेमाल अब व्यापारियों पर गिरेगी गाज।

दमोह में एवरेस्ट इलाज के सामने से बस स्टैंड जाने बाले मार्ग की जो दुकानें सरकार के द्वारा अतिक्रमण में आती हैं उन दुकानों को तोड़ने के नोटिस पूर्व में भी दिए गए थे लेकिन व्यापारियों ने कुछ राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के कहने के कारण प्रशासन की बात ना मानते हुए धरना प्रदर्शन एवं चक्का जाम किया साथ ही प्रशासन की जिला मजिस्ट्रेट बबीता राठौर को अतिक्रमण तोड़ने से बैरंग लौटा दिया व्यापारियों का कहना था कि हमें पहले पट्टे दें उसके बाद में जुर्माना रसीद कटवा लूंगा ना जुर्माना दे रहे थे ना कब्जा खाली कर रहे थे ऐसे में प्रशासन की साख पर बन आई और प्रशासन द्वारा अब पुनः इन सभी दुकानदारों को अपने-अपने अतिक्रमण हटाने के फिर से नोटिस जारी किए गए हैं जिसमें 1 April तक अतिक्रमण हटाने की बात कही गई है अगर अतिक्रमण खुद से नहीं हटाया गया तो अतिक्रमण हटाने का पूरा हरजा खर्चा अतिक्रमण धारियों से लिया जाएगा।

जबकि प्रशासन व्यापारियों के पक्ष में ही काम कर रहा था लेकिन व्यापारी कुछ राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के कहने पर जिला प्रशासन से सीधे टकराव की स्थिति में देखें गये यही वजह है कि प्रशासन को भी अब कड़ी कार्यवाही करनी पड़ सकती है।

एवरेस्ट लॉज से बस स्टैंड वाली सड़क के व्यापारी जबकि अपनी दुकानें किराए पर चलाकर सालाना एक लाख से ऊपर कमा रहे हैं और कई दुकानदार तो ₹25000 महीने में अपनी दुकान किराए पर दिए हुए हैं लेकिन शासन प्रशासन को 5 से ₹10 हजार का जुर्माना भी नहीं देना चाहते जबकि छोटे गरीब दुकानदार जिनका साल में दो से तीन बार अतिक्रमण के नाम पर उनकी दुकान के सामने बनी पट्टियां तोड़ दी जाती है जिनसे उन छोटे दुकानदारों को हर साल 10 से ₹20 हजार अपनी पट्टी दोबारा।


से बनवाने में खर्चा आता है यह शासन-प्रशासन की दोहरी नीति को देखते हुए कई पेपरों में इसके खिलाफ समाचार भी आए कि गरीबों के लिए शासन प्रशासन का अमला 1 मिनट भी नहीं लगाता और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के लिए प्रशासन झुक जाता है। अगर बस स्टैंड क्षेत्र की यह दुकाने टूटती है तो माना जाएगा कि शासन-प्रशासन निष्पक्ष रुप से कार्यवाही करता है अगर नहीं टूटती और इस पर किसी भी प्रकार से नेता संरक्षण देते हैं तो उन गरीबों के साथ अन्याय होगा जिनकी साल में तीन बार अतिक्रमण हटाने के नाम पर लाखों रुपए का सरकार नुकसान कर देती है और वह गरीब शासन प्रशासन से कुछ नहीं कह पाते क्योंकि गरीब तो सिर्फ वोट देने के लिए बने हैं उनके लिए कोई नेता खड़ा नहीं होता।

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