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वैशाख  शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के महत्व और पूजा विधि और दान के फल का महत्व जाने।

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वैशाख  शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के महत्व और पूजा विधि और दान के फल का महत्व जाने।

पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्त्व माना गया है। इसके चलते हज़ारों श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों में स्नान और दान कर पुण्य अर्जित करते हैं। इस दिन श्रद्धा भक्ति के साथ स्नान के जल में नर्मदा या गंगाजल मिलाकर पुण्य लाभ लिया जा सकता है। वैशाख के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां पुष्करणी कही गई हैं,ये बड़ी पवित्र और शुभकारक हैं और सब पापों का क्षय करने वाली हैं। इनमें स्नान,प्रभु का ध्यान एवं दान-पुण्य करने से पूरे माह स्नान का फल मिल जाता है ।

 

पूजा-विधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नदी या घर में स्न्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। ईशान कोण में एक चौकी पर लाल,श्वेत या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें एवं पूजा करने के लिए पूर्व की ओर मुख करके बैठ जाएं। पूजा में पंचामृत,फल,पुष्प,पंचमेवा,कुमकुम केसर, नारियल,अक्षत व पीतांबर का प्रयोग करें।

पूर्णिमा को सहस्त्रनामों के द्वारा भगवान मधुसूदन को दूध से नहलाकर मनुष्य पापहीन वैकुण्ठ धाम में जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी पत्र डालकर भोग लगाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। सुख-शांति के लिए इस दिन पीपल के वृक्ष एवं चंद्रदेव को भी जल अर्पित करना चाहिए।

दान का फल
इस दिन जल से भरा हुआ कलश,छाता ,जूते,पंखा,सत्तू,पकवान,फल आदि दान करना चाहिए। वैशाख पूर्णिमा के दिन किया गया दान गोदान के समान फल देने वाला होता है। पंडित दिवाकर शास्त्री

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