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मध्यप्रदेश में अच्छी शिक्षा पर भू माफियाओं का कब्जा। प्रशासन ने स्कूल के लिए चयनित की जगह पर भू माफिया किए हैं कब्जा।

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मध्यप्रदेश में अच्छी शिक्षा पर भू माफियाओं का कब्जा। प्रशासन ने स्कूल के लिए चयनित की जगह पर भू माफिया किए हैं कब्जा।

जी हां आपको बता दें मैं बात कर रहा हूं दमोह जिले का गरीब हो या अमीर हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि मेरे बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल जाए ताकि उसका भविष्य बन जाए और शासन प्रशासन की भी मंशा अच्छे स्कूल खोलने की है जैसे कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में केंद्रीय स्कूल खोले गए जिसमें अच्छी शिक्षा मिल रही है अभिभावक हर वह कोशिश करते हैं कि हमारे बच्चे का एडमिशन केंद्रीय स्कूल में हो जाए इसके लिए वह नेताओं के चरणों में भी गिरने से गुरेज नहीं करते ।यही वजह है कि आज शिक्षा संस्थानों में कुछ बदलाव कर दिल्ली में आप पार्टी ने अपनी सरकार बनाई इससे राजनीतिक पार्टियों में भी एक बड़ा बदलाव देखा गया कि अब सभी राजनीतिक पार्टी चाहती है कि अच्छे स्कूल खोले जाएं ताकि गरीब से गरीब बच्चे को अच्छी एजुकेशन मिल सके क्योंकि हर व्यक्ति इस काबिल नहीं होता कि महंगे स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाएं लेकिन क्या करें गरीब मजबूर है अब शासन की मंशा अनुसार केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर मध्य प्रदेश सरकार भी स्कूल बनाने के प्रयास में लगी हुई है जिसमें

राज्य सरकार प्रदेश के एक लाख दो हजार सरकारी स्कूलों को मर्ज कर केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर 9200 ‘सीएम राइज’ स्कूल खोलने जा रही है। हिंदी-अंग्रेजी दोनों माध्यम में संचालित होने वाले ये स्कूल विश्वस्तरीय सुविधाओं (स्वीमिंग पूल, बैंकिंग काउंटर, डिजिटल स्टूडियो, कैफेटेरिया, जिम, थिंकिंग एरिया) से लैस होंगे। इनमें प्री-नर्सरी से हायर सेकंडरी की कक्षाएं संचालित होंगी। इन स्कूलों में 15 से 20 किमी की परिधि में रहने वाले बच्चे पढ़ेंगे और उन्हें स्कूल तक लाने व घर छोड़ने के लिए सरकार बस, वैन की सुविधा उपलब्ध कराएगी। सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है।

प्रदेश में स्थित तीन हजार संकुल केंद्रों को क्षेत्र के पांच-पांच हजार स्कूलों की सूची भेजकर सीएम राइज के लिए तीन-तीन स्कूलों का चयन करने को कहा गया है। सरकार ने तीन साल (2023) में सभी स्कूल शुरू करने का लक्ष्य रखा है। नई नीति में 15-20 किमी के दायरे में आने वाले पुराने स्कूलों का मर्जर किया जाएगा।
दमोह में चयनित हुई सीएम राइम्स राइस स्कूल के लिए जगह पर बाहुबली दबंग एवं राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगो का कब्जा है।

अब प्रशासन ने तो अपनी भूमिका पूरी तरह निभा दी और शासन को बता दिया कि जबलपुर सागर बाईपास पर 10 एकड़ सरकारी भूमि है जिस पर गरीब बच्चों के लिए अच्छे स्कूल बन सकते हैं लेकिन अब बात आती है कि उस अतिक्रमण को भला कौन हटाएगा जिस पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त नेताओं का कब्जा है ऐसे में लगता है कि प्रशासनिक अधिकारियों पर ही गाज ना गिर जाए। यह सभी बातें सामने आने के बाद मध्य प्रदेश लघु व्यापारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तनुज पाराशर ने एक मुहिम चलाई हुई है कि अपने बच्चों के भविष्य के लिए बन रहे अच्छे स्कूल पर अतिक्रमण धारियों के कब्जे हटाए जाएं अन्यथा मध्य प्रदेश लघु व्यापारी संघ इस पर मुख्यमंत्री को ज्ञापन के साथ अनेक आंदोलन करने के लिए विवश होगा

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