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प्रधानमंत्री के काम करने का तरीका अभी तक के सभी नेताओं से अलग है।

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प्रधानमंत्री के काम करने का तरीका अभी तक के सभी नेताओं से अलग है।

बड़ी बड़ी खबरों के बीच छूट जाती हैं छोटी महत्वपूर्ण खबरें जिन से होता है जनता का सीधा सरोकार छोटी महत्वपूर्ण खबरें देखने के लिए देखते रहे डेंजर भारत।

आपको बता दें कि जब प्रधानमंत्री ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण कार्यक्रम किया था जिसमें हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश पाकिस्तान चीन भूटान को बुलाया गया था ताकि उन्हें अपने तरीकों से अवगत करा दें आज प्रधानमंत्री के तरीकों पर ना चलने वाले देशों की हालत आप देख सकते हैं भारत का रवैया स्पष्ट है पहले बताते हैं समझाते हैं

फिर ठोकते हैं ऐसा ही कुछ दिन पहले फिल्म इंडस्ट्री के सभी कलाकारों को प्रधानमंत्री आवास पर बुलाकर अपने तरीके से बताया गया था कि आप अपने आप में बदलाव लाएं नहीं तो आप को बदल दिया जाएगा जिसका असर भी अब देखने को मिल रहा है।

ऐसे ही नोटबंदी से पहले सभी टैक्सपेयर को राहत देते हुए कहा गया था कि अपना टैक्स ईमानदारी से भरें और समय भी दिया उसके बाद भी लोग नरेंद्र मोदी की बातों को सीरियस नहीं लिया जब नोट बंदी हुई तो समझ में आया कि पहले से कह रहे थे पहले समझ जाते तो सही रहता।

उसके बाद सभी राजनेताओं को समझाने के लिए वीआईपी कल्चर खत्म करते हुए लाल बत्ती हटवा दी ताकि कोई भी मंत्री विधायक वीआईपी नजर ना आए। इसके बावजूद भी अभी भी कुछ नेता सत्ता में आते ही पब्लिक सर्वेंट को अपना नौकर और पब्लिक को अपनी प्रजा समझकर कार्य कर रहे हैं। अब कुछ नेताओं ने पैर पड़वाना जैसे कार्य के लिए वीआईपी कल्चर बना लिया है इन सभी बातों पर गौर करते हुए आप देख सकते हैं कि प्रधानमंत्री कई मंचों से पैर पड़ने वाले गरीब लोगों को रोक देते हैं

उल्टा उन्हीं के पैर पड़ते हैं आपको बता दें कि कुंभ में सफाई कर्मियों के योगदान के बदले सफाई कर्मचारियों के पैर धोए थे और साथ में बैठकर फोटो भी खींचवाई थी यह संदेश उन नेताओं के लिए है जो अब जनता से पैर पड़वाकर अपने आपको भी आईपी समझते हैं। कल जब सुबह सुबह एक दुखद समाचार सामने आया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की माता जी का 100 साल की आयु में दुखदः निधन हो जाने पर पश्चिम बंगाल में कार्यक्रम रद्द होने जा रहा था जिसमें केंद्रीय मंत्री और रक्षा मंत्री पहले पहुंच चुके थे उन्हें जब प्रधानमंत्री की मां हीराबेन के दुखदः

निधन का समाचार मिला तो वह कार्यक्रम रद्द कर गुजरात जाना चाहते थे तभी पीएमओ से फोन गया कि देश सेवा का कार्य नहीं रुकना चाहिए। और माताजी को मुखाग्नि देने के तुरंत बाद वे वर्चुअल तरीके से पश्चिम बंगाल के कार्यक्रम वंदे भारत ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाई गई। और सभी कार्यकर्ताओं एवं भा जा पा के सभी मुख्यमंत्रियों को देश हित के कार्यों में तत्परता से कार्य करने को कहा गया।

अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह आप सोचें किसी और पार्टी के प्रधानमंत्री की मां का निधन हुआ होता तो कई राज्यों के मुख्यमंत्री आते और गुजरात का पूरा प्रशासन बीआईपी की देखरेख में लगा होता और प्रधानमंत्री की मां को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए लाव लश्कर के साथ पूरा शहर बंद कर दिया जाता लेकिन कल जो नजारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां की अंतिम यात्रा में दिखा वह आज से पहले कभी किसी राजनेता के ऊपर आए संकट मैं नहीं दिखा होगा। अगर कोई राजनेता वीआईपी कल्चर के साथ ऐसा करता तो इस दुख की घड़ी में शायद कोई उस पर सवाल भी खड़े ना करता। लेकिन अपने प्रधानमंत्री की बात ही कुछ और है यह एक लक्ष्मणरेखा है उन नेताओं के लिए जो चुनाव जीत जाने के बाद और मंत्री पद मिलने के बाद जो सरकारी पैसों का दुरुपयोग और अपना वर्चस्व दिखाने में लगे रहते हैं ऐसे लोगों के लिए आज प्रधानमंत्री ने एक उदाहरण पेश किया और अपनी माताजी को सरकारी अस्पताल में उनका इलाज कराया और सरकारी ही शव वाहन से उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सरकारी वाहन में बैठकर शमशान तक पहुंचे ।

अभी भी वीआईपी कल्चर नहीं छोड़ा जिन नेताओं ने अब आने वाले समय में उन नेताओं की खैर नहीं यह एक उदाहरण सेट कर दिया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने

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