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सतना जीएसटी टीम ने मारा दमोह में छापा। सर्वाधिक जीएसटी चोरी करने वाले पर नहीं दिया जा रहा कोई ध्यान।

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सतना जीएसटी टीम ने मारा दमोह में छापा। सर्वाधिक जीएसटी चोरी करने वाले पर नहीं दिया जा रहा कोई ध्यान।

दमोह आज सतना जीएसटी टीम द्वारा सिंह हार्डवेयर संचालक मनजीत सिंह के यहां इस साल में यह दूसरी बार जीएसटी की रेट डाली गई है सतना से आईजीएसटी की टीम ने बताया कि अभी स्टाक मिलाया जा रहा है स्टाक और बिल देखने पर प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि आधा माल कच्चे बिल पर आया हो और आधा पक्के बिल पर। जीएसटी द्वारा यह इस साल की दूसरी छापामार कार्यवाही है। आपको बता दें कि तम्बाकू प्रोडक्ट पर सर्वाधिक जीएसटी लगाई गई है।

केंद्र सरकार ने पान मसाला , सिगरेट और तंबाकू से जुड़े अन्य प्रोडक्ट्स पर लगाए जाने वाले जीएसटी कंपनसेशन सेस की अधिकतम दर तय कर दी है । इसके साथ ही , अधिकतम दर को उनके रिटेल सेल प्राइस से जोड़ दिया गया है । इसे वित्त विधेयक 2023 में संशोधन के तहत लाया गया था , जिसे लोकसभा ने शुक्रवार को पारित कर दिया । ये संशोधन एक अप्रैल , 2023 से लागू होंगे । संशोधन के अनुसार , पान मसाला के लिए अधिकतम जीएसटी कंपनसेशन सेस रेट रिटेल सेल प्राइस प्रति यूनिट का 51 % होगा ।

मौजूदा व्यवस्था के तहत सेस उत्पाद के मूल्य के अनुसार 135 फीसदी पर लगाया जाता है । सिगरेट और तंबाकू सेस की अधिकतम सीमा तय तंबाकू की दर 4,170 रुपये प्रति हजार स्टिक के साथ मूल्य के अनुसार 290 % या प्रति यूनिट रिटेल सेल प्राइस का 100 % तय की गई है । अभी तक सबसे ऊंची दर 4,170 रुपये प्रति हजार स्टिक के साथ मूल्यानुसार 290 फीसदी है । यह सेस जीएसटी की सबसे ऊंची 28 प्रतिशत की दर के ऊपर लगाया जाता है ।

जीएसटी की सर्वाधिक टैक्स लगाए जाने वाले प्रोडक्ट पर आज तक दमोह जिले में जीएसटी अधिकारियों द्वारा कोई छापामार कार्यवाही नहीं की गई जबकि कई बार समाचार पत्रों के माध्यम से और शिकायतों के माध्यम से दमोह में बिक रही तम्बाकू गुटके वालों द्वारा बगैर बिल के तंबाकू प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं बिल मांगने पर ग्राहकों को माल देने से ही मना कर दिया जाता है जिस वजह से ग्राहक परेशान होता है और बगैर बिल के माल लेने के लिए मजबूर हो जाता है जिससे सरकार की प्रतिदिन लाखों रुपए की जीएसटी की चोरी की जा रही है आज तक दमोह में सर्व अधिक खाए जाने वाला गुटखा बेचने वाले दमोह में किसी को एजेंसी नहीं दिए हुए हैं खुद ही जबलपुर नाके पर अपनी गोदाम बना कर मनमाने रेटों पर माल बेचते हैं कई बार तो दुकानदारों ने यह तक कहा कि यह कुछ दुकानदारों को अपना एजेंट बना देते हैं और 18000 का बोरा ₹22000 में बाजार में बिकने लगता है जिसे इनके एजेंटों द्वारा माल की कमी बताकर अधिक दाम पर बेचा जाता है जिससे पर बोरी पर ₹4000 रुपए अतिरिक्त कालाबाजारी करके कमाए जा रहे हैं जिस पर आज तक दमोह जीएसटी की कोई रेट नहीं डाली गई क्या वजह है कि आज भी कालाबाजारी कर लाखों रुपए का सरकार को चूना लगाने वाले लोग आज भी जीएसटी अधिकारियों की पकड़ से बाहर हैं।

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