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दमोह जिला अस्पताल बना शराबियों का अड्डा दमोह कलेक्टर के लाख प्रयासों के बाद नहीं रुक रही जिला अस्पताल में शराब खोरी। डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर।

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दमोह जिला अस्पताल बना शराबियों का अड्डा दमोह कलेक्टर के लाख प्रयासों के बाद नहीं रुक रही जिला अस्पताल में शराब खोरी। डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर।

दमोह जिला अस्पताल में आए दिन शराब खोरी की घटनाएं सुनने को मिलती रहती हैं शराब खोरी के चलते जहां जिला अस्पताल के स्टाफ के साथ शराब खोरी की शिकायतें जिला अस्पताल के वॉर्ड बाय ओर डॉक्टर लगाते रहे हैं। कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप के बाद हत्या मामले में जहां आरोपी को अपराधी प्रवृत्ति का बताया गया था वा अधिक शराब का सेवन भी किये था जिस वजह से कोलकाता में इतनी बड़ी घटना सामने आई थी जिस पर संपूर्ण भारत देश में आंदोलन हुआ था तभी दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने भी जिला अस्पताल से एक बच्चा चोरी हो

जाने के बाद सख्ती दिखाते हुए आदेश जारी किया था कि जिला अस्पताल में शराबियों को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा और जिला अस्पताल के पुराने सुरक्षा गार्डों को भी बदला जाएगा पुराने सुरक्षा गार्डो में से कुछ ही सुरक्षा गार्ड ही बदले गए यही वजह है कि जिला अस्पताल आज अपराधियों और शराबियों का अड्डा बना हुआ है यहां आने वाले मरीजों के परिजनों के साथ जिला अस्पताल के सुरक्षा गार्डों द्वारा शराब पिए जाने पर जहां जिला अस्पताल में अंदर जाने नहीं दिया जाता हैं तो फिर सवाल यह है कि जिला अस्पताल में जगह-जगह रोज सुबह से शराब की खाली बांटलें क्यों मिल रही है इसकी वजह साफ समझी जा सकती है कि जिला

अस्पताल में आने वाले मरीज के परिजन जो जिला अस्पताल में अपने मरीज को लाते हैं उनके साथ अटेंडर के रूप में सिर्फ एक ही व्यक्ति रह सकता है जिसका गेट पास भी अनिवार्य है बगैर गेट पास के जिला अस्पताल के अंदर मरीज के परिजन को नहीं जाने दिया जाता हैं अब अकेला परिजन भला एक बोतल दारु तो पी नहीं सकता इसका मतलब है कि अस्पताल के स्टाफ ही शराब की बांटले रोजाना खाली कर रहे हैं और जिला अस्पताल के मुख्य गेट के डस्टबिन में खुलेआम डाल रहे हैं क्योंकि उन्हें मालूम है सैया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का अगर कोई मरीज के परिजनो ने लुक छिपकर दारू पी भी होती तो उसकी इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह जिला अस्पताल के मुख्य गेट के डस्टबिन में शराब की

खाली बोतल डाल दे जिला कलेक्टर को इस संबंध में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए नहीं तो शराब खोरी के चलते जिला अस्पताल में भी कोलकाता जैसी कोई अप्रिय घटना हो सकती है यहां पर पदस्थ गार्ड्स की शिकायतें आए दिन परिजन करते दिखाई देते हैं कि यह लोग खुद शराब पीते हैं और अगर कोई मरीज का परिचित शराब पीकर आ जाए तो उसे अस्पताल में घुसने भी नहीं दिया जाता।

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