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रक्षाबंधन से पहले दमोह में खरीदी का महापर्व, लाडली बहनों ने जमकर की खरीदारी – बाजारों में उमड़ी भारी भीड़।डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर दादा भाई 

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रक्षाबंधन से पहले दमोह में खरीदी का महापर्व, लाडली बहनों ने जमकर की खरीदारी – बाजारों में उमड़ी भारी भीड़।डेंजर भारत प्रमुख तनुज पाराशर दादा भाई

दमोह।
सावन की रिमझिम फुहारों के बीच रक्षाबंधन से एक दिन पहले दमोह जिले का बाजार किसी उत्सव से कम नजर नहीं आया। जैसे ही मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की राशि बहनों के खातों में पहुँची, वैसे ही शहर की गलियों, बाजारों और दुकानों में रौनक लौट आई। बहनों के चेहरे पर एक अलग ही चमक देखने को मिली।

राखी से लेकर श्रृंगार तक, हर चीज़ की रही जबरदस्त मांग
शहर के , घंटाघर, स्टेशन रोड, समेत प्रमुख बाजारों में बहनों ने भाईयों के लिए राखियाँ, मिठाइयाँ, कपड़े और अन्य उपहारों की जमकर खरीदारी की। दुकानदारों के चेहरे भी खिले रहे क्योंकि बीते सप्ताह फीका रहा बाजार आज जीवंत हो उठा।

ट्रैफिक व्यवस्था रही चाक-चौबंद
बढ़ती भीड़ को देखते हुए दमोह एसपी के आदेश पर एडिशनल एसपी के मार्गदर्शन में ट्रैफिक सूबेदार ने मोर्चा संभाला। भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया, वहीं कई स्थानों पर अस्थाई पार्किंग व्यवस्था भी बनाई गई, जिससे आमजन को कोई असुविधा न हो। पुलिस प्रशासन की चुस्त कार्यप्रणाली के कारण बाजार में भीड़ तो रही, पर अफरा-तफरी नहीं हुई।

लाडली बहन योजना बनी बहनों के लिए सौगात
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई लाडली बहना योजना बहनों के लिए किसी त्योहार के तोहफे से कम नहीं रही। योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि का सदुपयोग करते हुए बहनों ने अपने लिए और अपने भाइयों के लिए आवश्यक वस्तुएँ खरीदीं।

रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर भावनाओं का ज्वार
बहनों ने बताया कि यह त्यौहार सिर्फ राखी बाँधने का नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की अटूट डोर का प्रतीक है। कल बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधेंगी और भाई उनसे उनकी सुरक्षा का वचन देगे। हिंदू मान्यता अनुसार रक्षाबंधन का पर्व रक्षासूत्र के साथ-साथ प्रेम, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है।

रक्षाबंधन से एक दिन पहले दमोह की फिजाओं में उल्लास, उत्सव और आत्मीयता घुल गई है। लाडली बहनों की खुशी, बाजारों की चहल-पहल और प्रशासन की सजगता ने एक आदर्श त्यौहारिक माहौल प्रस्तुत किया।

बढ़ती महंगाई ने तोड़ी बहनों की कमर, सोने-चांदी की राखियों से हट रहा रुझान

इस बार रक्षाबंधन पर बाजार में भले ही सजावट और चमक देखने को मिली, लेकिन महंगाई ने आम बहनों की जेब पर गहरी चोट की है। खासकर सोने-चांदी की राखियों की दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहा। पहले जहां बहनें अपने भाई के लिए चांदी की राखी खरीदने में रुचि दिखाती थीं, वहीं अब जरूरतों और बजट के चलते उन्हें साधारण राखियों की ओर रुख करना पड़ा।

महंगाई के कारण सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे बहनों का इनकी ओर से रुझान घटता जा रहा है। पहले जो राखी 500 से 1000 रुपए में आसानी से मिल जाती थी, अब वही 1500 से ऊपर की हो गई है। इस कारण कई दुकानदारों ने भी स्टॉक कम कर दिया है, क्योंकि मांग न के बराबर हैं।

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