जहां मैं जाती हूं, तू वहीं चला आता है…” — क्या लूट और चौकी प्रभारी का यह महज़ संयोग है?
1 min read
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|

“जहां मैं जाती हूं, तू वहीं चला आता है…” — क्या लूट और चौकी प्रभारी का यह महज़ संयोग है?
दमोह। जिले में लगातार हो रही लूट की घटनाओं ने आम लोगों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं के बीच एक ऐसा संयोग भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस पर लोग फिल्मी अंदाज में चुटकी लेते नजर आ रहे हैं।

हाल ही में नरसिंहगढ़ चौकी क्षेत्र के सूखी पिपरिया गांव में विजय जैन के घर अज्ञात बदमाशों ने लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवर और नगदी पर हाथ साफ कर दिया। घटना के बाद चौकी प्रभारी रोहित द्विवेदी सहित पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले जब रोहित द्विवेदी सागर नाका चौकी प्रभारी थे, तब उनके कार्यकाल में भी क्षेत्र में एक चर्चित लूट की घटना हुई थी। अब उनके नरसिंहगढ़ चौकी का प्रभार संभालने के कुछ समय बाद यहां भी बड़ी लूट होने से लोग इसे महज संयोग मानें या कुछ और—इसी पर चर्चा कर रहे हैं।
चाय की दुकानों से लेकर बाजार तक लोग मजाकिया अंदाज में वही पुराना फिल्मी गीत गुनगुनाते सुनाई दे रहे हैं—
“जहां मैं जाती हूं, तू वहीं चला आता है… चोरी-चोरी मेरे दिल में समाते हो, यह तो बता दे कि तू मेरा कौन है…”

हालांकि, यह केवल जनचर्चा और व्यंग्य का विषय है। इन घटनाओं का चौकी प्रभारी रोहित द्विवेदी से किसी भी प्रकार का संबंध या संलिप्तता सिद्ध नहीं है। अपराधियों को पकड़ना और अपराध पर नियंत्रण रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, इसलिए सवाल व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की प्रभावशीलता पर उठ रहे हैं, किसी व्यक्ति की नीयत पर नहीं।
अब लोगों की निगाह इस बात पर है कि नरसिंहगढ़ की इस लूट का खुलासा पुलिस कितनी जल्दी करती है और क्या लगातार हो रही ऐसी वारदातों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space



