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कोई तो बात  हुई होगी, यूं ही बेवजह कोई चर्चा नहीं होती। दशकों से बंद पड़ी मोहन टॉकीज फिर आई चर्चाओं में।

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कोई तो बात  हुई होगी, यूं ही बेवजह कोई चर्चा नहीं होती। दशकों से बंद पड़ी मोहन टॉकीज फिर आई चर्चाओं में।

आपको बता दें कि पिछले कई दशकों से बंद पड़ी मोहन टॉकीज मैं जब आज एक मल्टीप्लेक्स बन रहा है तब यहां होने वाली अजीबो गरीब घटनाओं से मोहन टॉकीज अचानक से ही चर्चाओं में बनी हुई है। मोहन टॉकीज पहली बार चर्चाओं में तब आई जब सागर के मुखारयां से मिलकर दमोह के अजीत जैन ने जबलपुर के संदीप चौकसे को मोहन टॉकीज का सौदा कराया। मोहन टाकीज सौदे के चंद दिनों बाद ही अचानक से अजीत जैन की तबीयत खराब हो गई तब डॉक्टर ने कोरोना से पीड़ित बताया डॉक्टर ने उन्हें कोरोना से लगभग बचा ही लिया था उसके बाद सुनने में आया कि अचानक से अजीत जैन जी का दुखद निधन हो गया।

 

उस वक्त लोग उस बात को भी मोहन टॉकीज से जोड़ते नजर आए थे। पिछले माह 20 सितंबर को फिर एक बार मोहन टॉकीज चर्चाओं आई।जब मोहन टाकीज के भीतर से अचानक से ईंट पत्थर चलने लगे जो कि वहां के आधा दर्जन दुकानदारों की दुकानों पर गिरे जब दुकानदारों ने टॉकीज में जाकर देखा तो वहां कोई नहीं मिला जिससे लोग तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे तो वहीं कई बुजुर्गों ने उस वक्त के किस्से कहानियां बताते हुए मोहन टॉकीज में स्थित बहर का कहर की कई कहानियां सुनाई थी।

 

तो अब ताजा मामला दमोह सागर और सतना से जुड़ा हुआ है।
सागर के एक वृद्ध जो करीब 1 साल से लापता सतना जिले में दरिद्रता की जिंदगी जीते हुए भटक रहे थे सतना के समाजसेवियों ने उनका एक वीडियो बनाया जिसमें उनसे पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम सही बताया और अपनी पत्नी का नाम सही बताया और अपने बच्चों का नाम भी सही बताया लेकिन जब बात आई पते की तो उन्होंने अपना पता मोहन टॉकीज बताया और पता दमोह का जिससे उनका यह वीडियो दमोह की सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हुआ दमोह के समाजसेवियों ने सतना के समाजसेवियों से संपर्क किया तब जाकर एक माह से गुमशुदा वृद्ध को सतना और दमोह के समाजसेवियों के सार्थक प्रयास से मिलवाया गया परिजनों से।

 

सागर से परिजन पहुंचे दमोह वृद्ध से मिल परिजनों के चेहरों पर छाई मुस्कान।


दमोह। सतना से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहें वीडियो में जिसमें वृद्ध के लिए दमोह निवासी बताया जा रहा था। वीडियो सोशल मीडिया के माध्यम से दमोह में जिला रैकवार मांझी समाज के सभी साथियों और अन्य समाज के सभी साथियों के पास पहुंचा जिसे गुमशुदा वृद्ध को परिजनों से मिलाने के लिए सभी ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर परिजनों को खोजने के काम में सभी साथियों ने भरपूर सहयोग दिया। लेकिन परिजनों का पता नहीं लग पा रहा था। दमोह शहर के युवाओ ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार संपर्क किया लेकिन वृद्ध की पहचान नहीं हो पा रही थी।


तब दोपहर में दमोह के वरिष्ठ पत्रकार मनोहर शर्मा जी से बात हुई उसके बाद सतना के सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सबनानी जी,आलोक वासनी जी, प्रिंस तोलवानी जी,महेश सवनानी जी से दोपहर में बात हुई तो तत्काल ही सतना से दमोह निवासी युवा साथी गुमशुदा मुन्ना लाल रैकवार जी को दमोह के बस स्टैंड लेकर पहुंचे पूरे दिन हम सभी लोग दमोह में परिजनों को खोजते रहे पर परिजन नहीं मिले। जब मुन्ना लाल रैकवार दमोह आये तो बस स्टैंड पर समाज के संभागीय अध्यक्ष राकेश धुरिया जी, जिला अध्यक्ष राकेश रैकवार जी, युवा रैकवार मांझी समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोंटी रैकवार दादा मुन्ना रैकवार से मिले तब समाज के संभागीय अध्यक्ष राकेश धुरिया ने देखते ही बताया कि ये तो मुन्ना ऊर्फ लल्लू रैकवार है।जो अपना पता मोहन टाकीज़ बता रहा है लेकिन वृद्ध के परिजनों का पता तब भी नहीं चला इस दौरान हम लोगों ने दादा को दमोह जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया फ़िर सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड की तब मेरे छोटे भाई दमोह निवासी डाक्टर अंकुर रैकवार ने बताया कि ये मेरे रिश्तेदार हैं। और सागर के शनिचरी वार्ड के निवासी हैं।

तब युवा रैकवार मांझी समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोंटी रैकवार ने तत्काल ही परिजनों से बात कर दमोह में वृद्ध मुन्ना रैकवार की रात्रि 12:30 बजे वाट्सएप वीडियो काल के माध्यम से बात करवाई तब जाकर पृष्टि हुई कि ये वृद्ध सागर निवासी मुन्ना लाल रैकवार है।


सागर से परिजन दमोह पहुंचे और वृद्ध को देखकर सभी के चेहरों पर मुस्कान आ गई। सागर दमोह आयें परिजनों ने सतना और दमोह के समाजसेवियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
दमोह में वृद्ध को खोजने और मदद करने वालों में युवा रैकवार मांझी समाज के प्रदेश अध्यक्ष मोंटी रैकवार,रैकवार मांझी समाज के संभागीय अध्यक्ष राकेश धुरिया, जिला अध्यक्ष राकेश रैकवार,पैलू रैकवार, प्रहलाद रैकवार,हिमांशु रैकवार, डॉ अंकुर रैकवार, की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


परिजनों के मिल जाने के बाद जहां लोगों में इस बात की भी चर्चा बनी हुई है कि आखिरकार मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को अपने घर के सभी सदस्यों के नाम पता होने के बाद भी वह अपना पता मोहन टॉकीज क्यों बता रहा थे।

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