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मध्यान भोजन में कीड़े, सूखे चावल खाने को मजबूर बच्चे सरकारी स्कूल में शिक्षा और योजना—दोनों पर सवाल**

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मध्यान भोजन में कीड़े, सूखे चावल खाने को मजबूर बच्चे
सरकारी स्कूल में शिक्षा और योजना—दोनों पर सवाल**


दमोह।शिक्षा में सुधार और बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सरकारी योजनाओं को पलीता लगाने में भ्रष्ट अधिकारी और लापरवाह स्कूल कर्मचारी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मध्यान भोजन योजना, जो बच्चों के पोषण और स्कूल उपस्थिति बढ़ाने के लिए चलाई जा रही है, उसी योजना में खुलेआम भ्रष्टाचार और लापरवाही सामने आ रही है।


ताजा मामला मध्यप्रदेश माध्यमिक शाला सुनवाही, जनपद पंचायत तेंदूखेड़ा का है, जहां बच्चों को परोसी गई दाल में कीड़े निकलने की शिकायत सामने आई है। जब बच्चे भोजन करने बैठे, तो दाल की हालत देखकर वे घबरा गए। इसी दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि बच्चे दाल छोड़कर सूखे चावल खाने को मजबूर हैं।
वीडियो में जब बच्चों से पूछा गया कि वे सूखे चावल क्यों खा रहे हैं, तो उन्होंने साफ कहा—
“दाल में कीड़े निकल रहे हैं।”


जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल हुआ, दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया। जांच के लिए तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी को स्कूल भेजा गया।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि स्कूल में दिया जा रहा मध्यान भोजन न सिर्फ गुणवत्ताहीन है, बल्कि निर्धारित मेनू के अनुसार भी नहीं दिया जा रहा। यह सीधे-सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
इसी दौरान एक और चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। जब कक्षा पाँच के छात्र समीर से उसके स्कूल का नाम पूछा गया, तो वह जवाब नहीं दे पाया। उसने सिर्फ इतना कहा—
“मैं सरकारी स्कूल में पढ़ता हूँ।”


यह जवाब अपने आप में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। जिस स्कूल में बच्चा अपने स्कूल का नाम तक नहीं जानता, वहां पढ़ाई की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनपद सीईओ मनीष बागरी ने बच्चों से पढ़ाई को लेकर सवाल-जवाब किए, साथ ही गिनती और पहाड़े भी सुने। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि स्कूल में पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो रही है।


सरकार बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन इस स्कूल में न तो बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल रही है और न ही सरकारी योजनाओं का सही लाभ। अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या इस मामले में दोषी स्कूल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
अब सबकी निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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