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दमोह की देसी कलारी बनी बार! खुलेआम बिक रही खुली शराब, उपभोक्ताओं की जान से खिलवाड़ — जिम्मेदार कौन?

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दमोह की देसी कलारी बनी बार! खुलेआम बिक रही खुली शराब, उपभोक्ताओं की जान से खिलवाड़ — जिम्मेदार कौन?
दमोह।
दमोह जिला इन दिनों मध्य प्रदेश की सुर्खियों में है। हटा, पटेरा और पथरिया क्षेत्रों में जहां एक ओर शराब को प्रिंट रेट से 20 से 40 प्रतिशत अधिक दामों पर बेचा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर क्षेत्र में देसी कलारियों को नियम विरुद्ध बार में तब्दील कर दिया गया है। इस पूरे खेल में आबकारी विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


ग्रामीण अंचलों में ₹180 की शराब ₹220 में और ₹100 की शराब ₹120 में बेची जा रही है। उपभोक्ताओं को पक्का बिल तक नहीं दिया जा रहा, जिससे वे किसी भी प्रकार का क्लेम या शिकायत नहीं कर पा रहे हैं। इस अवैध वसूली से शराब ठेकेदारों को प्रतिदिन लाखों रुपये का फायदा हो रहा है, जबकि उपभोक्ता खुलेआम लुटने को मजबूर हैं।


हैरानी की बात यह है कि बार-बार समाचार प्रकाशित होने के बावजूद आबकारी विभाग ने न तो कोई ठोस कार्रवाई की, न जुर्माना लगाया गया और न ही लाइसेंस निरस्त किए गए। इससे यह संदेह और गहरा होता जा रहा है कि इस अवैध कमाई का मोटा हिस्सा ऊपर तक पहुंच रहा है, तभी जिम्मेदार अधिकारी ‘गांधारी’ बने बैठे हैं।


नगर क्षेत्र की स्थिति और भी चिंताजनक है। अंग्रेजी शराब दुकानों के बाहर ब्लैक में सस्ती शराब खुलेआम बेची जा रही है, जिसकी भरपाई देसी कलारियों से की जा रही है। देसी शराब दुकानों पर ₹92 से ₹106 मूल्य वाली शराब खुले में परोसी जा रही है। दुकानों के बाहर खड़े कर्मचारी ग्राहकों को आवाज लगाते हैं


“आदि लाल ले लो, आदि लाल ₹60 में!”
यानी एक पाव ₹120 में बेचकर लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त कमाई की जा रही है।
सरकारी नियम स्पष्ट हैं कि खुली शराब केवल लाइसेंस प्राप्त बार में ही बैठाकर पिलाई जा सकती है, लेकिन दमोह के बस स्टैंड क्षेत्र सहित कई जगहों पर देसी शराब दुकानों पर लोगों को खुलेआम बैठाकर शराब परोसी जा रही है। इससे न केवल कानून की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि शराब की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरी बिक्री बिना बिल के की जा रही है। यदि किसी उपभोक्ता की तबीयत बिगड़ती है या कोई जनहानि होती है, तो वह न तो दुकानदार पर ब्लेम कर सकता है और न ही क्लेम। इसके बावजूद जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है।
प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।


यदि भविष्य में खुली शराब के कारण कोई भी जनहानि होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की होगी।
सजग पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए, इस अवैध कारोबार की ओर प्रशासन का ध्यान पहले भी आकर्षित किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा — क्योंकि सवाल सिर्फ कानून का नहीं, जनता की जान का है। शराब दुकान के बाहर खुलेआम  बेची जा रही अवैध शराब का जल्द करेंगे एक और बड़ा खुलासा पिक्चर अभी बाकी है 

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