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बिना पंचनामा–जप्तिनामा के 374 किलो लड्डू जप्त – खाद्य विभाग की मनमानी चरम पर!

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बिना पंचनामा–जप्तिनामा के 374 किलो लड्डू जप्त – खाद्य विभाग की मनमानी चरम पर!

दमोह। जिले में खाद्य एवं औषधि विभाग की मनमानी अब खुलेआम कानून को ठेंगा दिखाने लगी है। वर्षों से पदस्थ अधिकारी खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। दमोह में पदस्थ खाद्य अधिकारी राकेश अहिरवार तो मानो खुद को “खुदा” समझ बैठे हैं। शनिवार को बजरिया वार्ड नंबर 6, शासकीय उचित मूल्य दुकान के पीछे स्थित किशोर ठाकुर (बेसन लड्डू निर्माता) के यहां धावा बोलकर 374 किलो लड्डू जब्त कर लिए गए।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि –
न कोई पंचनामा बनाया गया,
न कोई जप्तिनामा तैयार हुआ,
और न ही निर्माता को कोई कागज दिया गया।

लड्डू कहां रखे गए? क्या जांच रिपोर्ट आने तक वे सुरक्षित और खाने योग्य रहेंगे? इसका जवाब खुद अधिकारी भी नहीं दे पा रहे।

खाद्य दल ने मौके पर सिर्फ तथाकथित “मैजिक बॉक्स” से जांच का ड्रामा किया और सीधे प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि यह प्रेस विज्ञप्ति जनसंपर्क विभाग से “कलेक्टर सुधीर कोचर के आदेश पर” जारी करवाई गई। सवाल यह है कि


क्या सचमुच कलेक्टर ने इस तरह की नियम विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए?
या फिर अधिकारी जानबूझकर कलेक्टर की छवि को धूमिल करने पर तुले हैं?

अगर मैजिक बॉक्स में नमूने अमानक साबित नहीं हुए, तो फिर 374 किलो लड्डू किस आधार पर जब्त किए गए? और अगर जब्ती की गई तो जप्तिनामा की प्रति निर्माता को क्यों नहीं दी गई?

सूत्र बताते हैं कि राकेश अहिरवार की कार्यवाहियों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आरोप ये भी हैं कि जहां दुकानदारों से “सेटिंग” हो जाती है, वहां सब कुछ मानक दिखा दिया जाता है। लेकिन जहां समझौता नहीं होता, वहां “अमानक” का ठप्पा लगाकर दुकान को सील या जब्ती कर दी जाती है।

दमोह की जनता पूछ रही है:
क्या यह कार्यवाही मिलावटखोरी रोकने के नाम पर उगाही का नया हथकंडा है?
क्या दमोह में वर्षों से जमे अधिकारी मिलकर खाद्य माफियाओं की ढाल बन चुके हैं?
और क्या प्रशासन आंख मूंदकर इनकी मनमानी को संरक्षण दे रहा है?

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