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दमोह में 30 अवैध शराब ठिकाने, फिर प्रदेश की सूची में दमोह का नाम क्यों नहीं?

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दमोह में 30 अवैध शराब ठिकाने, फिर प्रदेश की सूची में दमोह का नाम क्यों नहीं?

ठेकेदारों के आपसी विवाद में वायरल हुई थी सूची, 30 स्थानों पर अवैध बिक्री और 7 अहातों का दावा; जिलावार आंकड़ों में दमोह गायब होने से उठे सवाल
दमोह। मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई और निगरानी को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन दमोह से सामने आई एक सूची ने सरकारी आंकड़ों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।दरअसल, शराब ठेकेदारों के आपसी विवाद के चलते एक-दूसरे के अवैध शराब बिक्री के ठिकानों की सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात सामने आई थी। इस सूची में दमोह शहर के करीब 30 स्थानों पर अवैध शराब बिक्री और 7 अवैध अहाते संचालित होने का दावा किया गया था। सूची में रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास, पालंदी चौक, पथरिया फाटक, इमलाई बायपास, पॉलिटेक्निक कॉलेज के आसपास, मंदिरों के समीप सहित शहर के कई सार्वजनिक स्थानों का उल्लेख किया गया।
एक तरफ 30 ठिकानों का दावा, दूसरी तरफ सरकारी सूची में दमोह गायब
मामला तब और गंभीर सवाल खड़े करता है, जब प्रदेश की प्रकाशित जिलावार अवैध शराब बिक्री की लोकेशन वाली सूची पर नजर जाती है। इसमें प्रदेश के कई जिलों के आंकड़े दर्ज हैं, लेकिन दमोह का नाम दिखाई नहीं देता।


सूची के अनुसार रीवा में 140, सागर में 84, उमरिया में 74, छिंदवाड़ा में 68, जबलपुर और गुना में 62-62 सहित अन्य जिलों में भी अवैध शराब बिक्री की लोकेशन दर्ज की गई हैं।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब दमोह में 30 स्थानों पर अवैध शराब बिक्री के ठिकानों का दावा सामने आया था, तो प्रदेश की जिलावार सूची में दमोह का आंकड़ा क्यों नहीं है?


आंकड़ों में दमोह गायब, जमीन पर 30 ठिकानों का दावा!
क्या ठेकेदारों के विवाद में वायरल हुई सूची गलत थी?
क्या उस सूची में बताए गए स्थानों पर जांच हुई?
क्या जांच के बाद अवैध शराब बिक्री की पुष्टि नहीं हुई?
या फिर इन स्थानों की जानकारी प्रदेश स्तर के रिकॉर्ड में शामिल ही नहीं की गई?इन सवालों का जवाब आबकारी विभाग और जिला प्रशासन की ओर से सामने आना जरूरी है।हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया पर वायरल सूची को अपने आप में सरकारी अथवा प्रमाणित दस्तावेज नहीं माना जा सकता। सूची की सत्यता की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकती है। लेकिन यदि इसमें लगाए गए आरोप गलत हैं तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि सही हैं तो कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।


कार्रवाई होती है, फिर भी सवाल क्यों?
दमोह में समय-समय पर अवैध शराब बिक्री के मामलों में पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा कार्रवाई किए जाने की खबरें सामने आती रही हैं। कई मामलों में अवैध शराब के साथ आरोपियों को पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आती है।इसके बावजूद यदि शहर में बड़ी संख्या में अवैध शराब बिक्री के ठिकानों की शिकायतें या सूचियां सामने आती हैं तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।अब सवाल आंकड़ों की पारदर्शिता का मुद्दा केवल अवैध शराब की बिक्री का नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़ों और जमीनी दावों के बीच तालमेल का भी है।
यदि दमोह शहर में 30 स्थानों और 7 अहातों की सूची सामने आई थी, तो संबंधित विभाग यह स्पष्ट करे कि
दमोह में अवैध शराब बिक्री के कितने ठिकाने वास्तव में चिन्हित किए गए?
इनमें से कितने स्थानों पर कार्रवाई हुई?


और प्रदेश की जिलावार सूची में दमोह का आंकड़ा क्यों दिखाई नहीं देता?
जब प्रदेश के कई जिलों के आंकड़े सार्वजनिक सूची में दर्ज हैं, तो दमोह का नाम गायब होना अपने आप में जांच और स्पष्टीकरण का विषय जरूर बन गया है।अब देखना यह है कि आबकारी विभाग और जिला प्रशासन इन सवालों का जवाब आंकड़ों के साथ देता है या फिर दमोह में अवैध शराब के कारोबार को लेकर उठ रहे सवाल यूं ही बने रहते हैं।

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