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राखी के प्यार पर ‘वसूली’ का आरोप! जेल में भाई को राखी बांधने पहुंचीं बहनें, उपहार सामग्री अंदर भेजने के लिए पैसे लेने की शिकायत

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राखी के प्यार पर ‘वसूली’ का आरोप! जेल में भाई को राखी बांधने पहुंचीं बहनें, उपहार सामग्री अंदर भेजने के लिए पैसे लेने की शिकायत

दमोह। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी खुशहाली और सुरक्षा की कामना करती हैं। लेकिन दमोह जेल में रक्षाबंधन के अवसर पर सामने आए कुछ आरोप इस पवित्र रिश्ते को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाएं और बहनें दमोह जेल पहुंचीं। जेल में बंद विचाराधीन बंदियों से मुलाकात कर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। जेल गेट के बाहर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ नजर आई। कारों और मोटरसाइकिलों से पहुंचे परिजनों के कारण जेल के सामने कई बार यातायात व्यवस्था प्रभावित होती दिखाई दी। खास बात यह रही कि जेल के सामने ही यातायात पुलिस की चौकी मौजूद होने के बावजूद जाम की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे।
भाई को राखी बांधने के बाद उपहार भेजने को लेकर गंभीर आरोप
जेल से बाहर निकलीं कुछ महिलाओं ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर आरोप लगाया कि जेल के अंदर भाई को राखी बांधने और मुलाकात की व्यवस्था तो की गई, लेकिन इसके बाद भाइयों के लिए लाए गए उपहार अथवा सामग्री को जेल के अंदर पहुंचाने के नाम पर उनसे पैसे लिए गए।
महिलाओं का कहना था कि वे अपने भाई के लिए रक्षाबंधन पर कपड़े, मिठाई अथवा अन्य निर्धारित सामग्री लेकर पहुंची थीं। उनका आरोप है कि जेल के अंदर सामग्री भेजने के लिए उनसे अतिरिक्त राशि की मांग की गई।
‘पैसा किस नियम के तहत लिया गया?’


इन आरोपों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बंदियों के परिजनों से किसी सामग्री को अंदर भेजने के लिए निर्धारित शुल्क लिया गया है, तो उस शुल्क की आधिकारिक रसीद क्या दी गई? राशि लेने का शासन अथवा जेल विभाग का नियम क्या है? और यदि किसी कर्मचारी द्वारा बिना रसीद अतिरिक्त पैसा लिया गया, तो वह राशि आखिर किसके पास गई?


रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व पर अपने भाई से मिलने और उसे राखी बांधने पहुंची महिलाओं से यदि नियम विरुद्ध किसी प्रकार की राशि वसूली गई है, तो यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि जेल में बंद कैदियों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाने का भी गंभीर आरोप बन सकता है।
जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी सच्चाई
इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। जेल गेट और मुलाकात स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, रक्षाबंधन के दिन जेल में प्रवेश करने वाले परिजनों का रिकॉर्ड, उपहार/सामग्री जमा करने का रजिस्टर और यदि कोई निर्धारित शुल्क लिया गया हो तो उसकी रसीदों की जांच की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।


सवाल यह भी है कि यदि जेल प्रशासन ने सामग्री अंदर भेजने के लिए कोई शुल्क निर्धारित किया था, तो क्या सभी परिजनों को इसकी जानकारी दी गई थी और क्या प्रत्येक भुगतान की विधिवत रसीद दी गई?
वरिष्ठ अधिकारियों से जांच और कार्रवाई की मांग
रक्षाबंधन के दिन सामने आए इन आरोपों को देखते हुए जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यदि किसी कर्मचारी द्वारा नियमों के विपरीत पैसे लेने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।


राखी के इस पवित्र पर्व पर अगर किसी बहन की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाया गया है, तो यह सिर्फ पैसों की वसूली का मामला नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की भावनाओं से खिलवाड़ का भी गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि जेल विभाग इन आरोपों की जांच कर सच सामने लाता है या फिर शिकायतें महज आरोप बनकर रह जाती हैं।

जेल में हो रही अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचार को लेकर जल्द करेंगे एक और बड़ा खुलासा

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