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माँ बंजारा देवी का 88 वर्षों से नहीं बदला मां का स्वरूप। चौरसिया समाज के पंडा दिवाला में शामिल हुए हजारों की संख्या में चौरसिया समाज के लोग

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“माँ बंजारा देवी का 88 वर्षों से नहीं बदला मां का स्वरूप ”

माँ बंजारा देवी ”
1935 में पहली प्रतिमा स्थापित की गई थी पुराना थाने पर जो परंपरा आज भी जारी है।
1933 से है अखाड़े की परंपरा दो वर्ष बाद प्रतिमा की हुई थी शुरुआत।


दमोह – आज भले ही पुराने लोग हमारे बीच ना हों लेकिन उनकी स्मृतियां आज भी इन दुर्गा समितियों में देखी जा सकती हैं जो परम्पराए हमारे बुजुर्ग शुरू करके गये उसे आज भी कुछ समितियां कायम किये हुए है दुर्गा उत्सव पर्व की बात करें तो दमोह नगर के पुराना थाना पर सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा वर्षों से एक ही स्वरूप में माँ बंजारा माता की स्थापना होती आ रही है जिसकी ख्याति दूर दूर तक है अगर यहां पर प्रतिमा के स्थापना की बात करें तो सबसे पहले अखाड़े की बात करनी होगी क्योंकि जिले का एक मात्र अखाड़ा जगदीश व्यायाम शाला के नाम से संचालित अखाड़ा है जो पूरी वेष भूषा के साथ अनुशासन में नज़र आता है यहाँ के पूर्व के अखाड़ा प्रबंधक सत्तू चौरसिया जी हो या उनके साथ के अनेक लोग जो परंपरा बनाकर गये अखाड़े का स्वरूप आज भी वही

है यहाँ अखाड़े की शुरुआत 1933 में हुई थी उसके दो वर्ष बाद यहाँ पुराना थाना पर 1935 से माँ बंजारा माता स्वरूप प्रतिमा रखी जाने लगी आज 88 वर्ष पूर्ण हो गए ना अखाड़े के और ना ही यहाँ रखी जाने वालीं देवी जी का स्वरूप बदला आज भी यहाँ परंपरागत दुर्गा उत्सव मनाते आ रहें हैं। रविवार दिन भर यहां कन्याओं को भोजन परोसा गया जो शाम तक चलता रहा यहाँ के पार्षद नितिन चौरसिया ने बताया कि हमारे यहाँ सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति के सभी लोग पूर्व से ही दशहरा पर्व की तैयारियां करने लगते है यहां प्रतिदिनआरती का आयोजन होता है जिसमें वार्ड के सभी लोग जमा होकर भव्य आरती में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेते हैं। यहाँ की समिति में मुख्य रूप से


एडवोकेट विपिन टंडन अध्यक्ष, राजू चौरसिया ,उमाशंकर चौरसिया, सूर्यकांत चौरसिया,आलोक असाटी
अखाड़ा उस्ताद, मनोहर लाल चौरसिया मासाब हैं इसके अलावा यहां के युवाओं का काफी सहयोग रहता है ।

नवरात्रि की नवमें दिन चौरसिया समाज द्वारा जवारे विसर्जन किए जाते हैं जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं एवं पुरुषों के साथ बच्चें भी इसमें शामिल होते हैं यह जवारे पंडा के घर बने दिवाले में 9 दिन तक मां की आराधना के साथ पूजन अर्चना के बाद नौवें दिन तालाब में विसर्जन के लिए जाते हैं इस बार जब पुराने थाने से जवारे जा रहे थे मातेश्वरी की कृपा से भारी बारिश हो रही थी लग रहा था कि शायद मां परीक्षा ले रही हो अपने भक्तों की भीषण बारिश में भी चौरसिया समाज के सभी लोग भीगते हुए जवारे विसर्जन में शामिल हुए और मां का आशीर्वाद और धर्म लाभ लिया।

ये तश्वीर गवाही देती है माँ बंजारा माता के स्थापना की )
ये 60 साल पुरानी ब्लैक एण्ड वाइट फ़ोटो गवाही देती है कि यहाँ की माँ बंजारा देवी माता स्वरुप की जो वर्षो से स्थापित जो रही है इसमें यहाँ के पूर्व की समिति के प्रबंधक स्व सत्तू चौरसिया जी की उम्र महज 15 वर्ष की है जो उस वक़्त के समय में स्थापित प्रतिमा के सामने अपने साथियो के साथ देखे जा सकते हैं इस प्रतिमा और यहाँ के अखाड़े को दशहरा पर्व पर मुख्य समारोह में घण्टाघर पर पुरुष्कृत किया जाता है ।

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