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गरीबों में शासन प्रशासन का खौफ और राजनैतिक संरक्षण प्राप्त लोगों से खौफ खाता प्रशासन।

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गरीबों में शासन प्रशासन का खौफ और राजनैतिक संरक्षण प्राप्त लोगों से खौफ खाता प्रशासन।

राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग अतिक्रमण कर अपनी दुकानें किराए पर चलाते हैं जिसका सालाना किराया एक लाख से अधिक वसूलते हैं और अगर इन पर कार्यवाही के लिए शासन प्रशासन का अमला पहुंचता है तो इनके रसूख के चलते शासन प्रशासन का बुलडोजर उल्टे पैर वापस लौट जाता है क्या वजह है कि शासन प्रशासन का बुलडोजर सिर्फ गरीबों के घर और दुकान तोड़ने के काम आता है ।

आपको बता दें कि नगरपालिका के टाउन हॉल में बीते कई सालों से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यापारी नगरपालिका के नाले पर कब्जा किए हुए हैं जिसे हटाने के लिए ढेरों समाचार और ढेरों शिकायतें की गई उसके बावजूद भी शासन-प्रशासन ऐसे बाहुबलियों और भू माफियाओं पर कार्यवाही करने से बचता नजर आता रहा है वही बात करें गरीबों के अतिक्रमण हटाने के लिए तो शासन प्रशासन को 1 मिनट भी नहीं लगता गरीबों का अतिक्रमण हटाने के लिए चाहे वह दरवाजे के सामने 1 फुट की पट्टी का अतिक्रमण भी हो तो उसे हटाने में शासन-प्रशासन देर नहीं करता भला देर करें भी तो क्यों क्योंकि गरीबों की सुनने के लिए दमोह में कोई नेता भी तो नहीं है वह भी तो सभी अमीरों के लिए कार्य करते हैं गरीब तो सिर्फ वोट देने के लिए बना है।

दमोह की तहसीलदार बबीता राठौर जोकि अतिक्रमण हटाने के लिए जानी जाती है जब गरीबों के अतिक्रमण के लिए शासन-प्रशासन जाता है तब उनके लिए कोई नेता खड़ा नहीं होता और बबीता राठौर बुलडोजर से अतिक्रमण हटा कर खूब वाहवाही लूटती हैं लेकिन यही दबंग महिला जब बाहुबली और भू माफियाओं का अतिक्रमण हटाने जाती है तो इन पर राजनीतिक दबाव आ जाता है तो उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ता है एवरेस्ट लॉज से बस स्टैंड की ओर जाने वाली सड़क पर जो अतिक्रमण धारी अतिक्रमण किए हुए हैं ना ही वह चालानी कार्यवाही करा रहे हैं

ना ही शासन-प्रशासन की बात मान रहे हैं और ना ही कब्जा हटा रहे हैं और जबकि इनमें कई ऐसे दुकानदार हैं जो अपनी दुकान किराए पर देकर लाखों रुपए साल के कमा रहे हैं लेकिन 5 या 10हजार की सालाना रसीद कटाने में इन्हें दिक्कत है छोटी रेहड़ी पटरी वालों को शासन प्रशासन द्वारा कई बार हटाया गया लेकिन उनके लिए कोई भी सत्ता या विपक्ष से खड़ा नहीं हुआ यही वजह है कि आए दिन रेहड़ी पटरी पर अपना व्यवसाय करने वाले व्यापारियों के तखत पान की गुमटी आए दिन मैडम द्वारा उठाकर थाने भेज दी जाती है और चालानी कार्यवाही भी कर दी जाती है लेकिन ऐसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं करती ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए है।

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